दिल्ली-NCR में नाबालिगों से गैंगरेप पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वीडियो में कहा- अपराधियों के मन में मौत का डर होना चाहिए
दिल्ली-NCR में नाबालिग लड़कियों के साथ हुई तीन गंभीर यौन अपराध की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक अपराध करने वालों के मन में मौत का डर नहीं होगा, तब तक इस तरह के अपराधों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना मुश्किल होगा। अदालत ने दिल्ली पुलिस को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत बताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने से पुलिस को हिचकना नहीं चाहिए।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच दिल्ली-NCR में हाल के दिनों में सामने आई तीन घटनाओं से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है। इन घटनाओं में ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जा रही चलती स्लीपर बस में नाबालिग के साथ कथित यौन अपराध, दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित गैंगरेप और स्वरूप नगर में किशोरी के साथ कथित गैंगरेप और हत्या का मामला शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को इन घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लिया था।
पुलिस से कहा- सिर्फ कागजों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताजताई। अदालत ने कहा कि केवल योजनाएं बनाना या कागजों पर सुरक्षा व्यवस्था दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। इन व्यवस्थाओं का जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू होना जरूरी है।कोर्ट ने पुलिस को जरूरत पड़ने पर सख्ती से कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटने की बात कही। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ लोग संविधान के अनुच्छेद 21 और मानवाधिकारों का हवाला देकर पुलिस की सख्त कार्रवाई पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन कानून के दायरे में रहते हुए पुलिस को अपना कर्तव्य निभाना होगा।
तीन घटनाओं पर लिया था स्वत: संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को दिल्ली-NCR में हुई इन घटनाओं को लेकर स्वत: संज्ञान लिया था। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक स्थानों को खराब रोशनी, कमजोर निगरानी, अपर्याप्त गश्त और अन्य प्रशासनिक कमियों के कारण महिलाओं और बच्चों के लिए जोखिम वाला क्षेत्र नहीं बनने दिया जा सकता।कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया था। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता लिज मैथ्यू को मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध की गई थी।
चार हफ्ते में रिपोर्ट देने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से दिल्ली-NCR में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कैसे की जा रही है, पुलिस गश्त किस तरह की जा रही है और यौन अपराधों से जुड़े मामलों की जांच की निगरानी के लिए कौन से सिस्टम इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
कोर्ट ने कमजोर और संवेदनशील स्थानों का सर्वे और मैपिंग करने, पार्कों तथा अन्य संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और CCTV तथा प्रकाश व्यवस्था की समीक्षा जैसे कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई में साफ हुआ कि अदालत केवल सुरक्षा से जुड़े सरकारी दावों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह भी देखना चाहती है कि सुरक्षा उपाय वास्तव में जमीन पर कितने प्रभावी हैं। अब दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई में इस पूरे मामले की दिशा तय होगी।