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सुप्रीम कोर्ट ने BCI के अधिकारों पर उठाए सवाल, वीडियो में पूछा- क्या लॉ कॉलेज और यूनिवर्सिटी को रेगुलेट करने का अधिकार है?

 

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अधिकार क्षेत्र को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि क्या BCI को देश के लॉ कॉलेजों और यूनिवर्सिटी को नियंत्रित और रेगुलेट करने का अधिकार प्राप्त है या नहीं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि BCI की कानूनी जिम्मेदारी वकीलों को लाइसेंस देने और उनके नामांकन के बाद शुरू होती है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में BCI को विशेषज्ञ संस्था कैसे माना जा सकता है।

शिक्षा से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञों की भूमिका पर सवाल

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा से जुड़े मामलों को लॉ स्कॉलर्स और शिक्षाविद ज्यादा बेहतर तरीके से देख सकते हैं। कोर्ट ने इस बात पर विचार करने की बात कही कि लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक मामलों को नियंत्रित करने का अधिकार BCI के पास होना चाहिए या नहीं।बेंच ने कहा कि कानूनी शिक्षा और वकालत के पेशे से जुड़े नियमों के बीच अंतर को समझना जरूरी है।

NALSAR विवाद के बाद उठा मामला

यह मामला हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) से जुड़ा है। दरअसल, BCI ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए।BCI के इस निर्देश के बाद कानूनी शिक्षा और वकीलों के नामांकन से जुड़े अधिकारों को लेकर सवाल उठे।

BCI की भूमिका पर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट अब यह जांच करेगा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया का अधिकार केवल वकीलों के पंजीकरण और पेशेवर आचरण तक सीमित है या वह लॉ यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के शैक्षणिक मामलों में भी हस्तक्षेप कर सकती है।कोर्ट की टिप्पणी के बाद BCI के नियामक अधिकारों और कानूनी शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।