1991 के लोन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केस रद्द; मृत आरोपियों के परिवारों को मिल सकती है करोड़ों की राशि
सुप्रीम कोर्ट ने करीब 35 साल पुराने 1991 के लोन घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आपराधिक केस को रद्द कर दिया है। अदालत ने मामले में आरोपी रहे बैंक अधिकारी को बरी कर दिया और बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पाया कि बैंक ने आरोपियों की संपत्तियों की नीलामी कर कर्ज की रकम वसूलने के बाद बची अतिरिक्त राशि उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को वापस नहीं की।
यह मामला भारतीय बैंक से जुड़े लोन प्रकरण का था, जिसमें सीबीआई ने बैंक अधिकारी पर ऋण स्वीकृति में गड़बड़ी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा और मामले को निराधार बताया।
बैंक ने नीलाम की थी संपत्तियां
मामले में दो आरोपी ऐसे थे, जिनकी सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी थी। बैंक ने उनकी गिरवी रखी गई संपत्तियों को नीलाम कर लोन की राशि वसूल की। लेकिन नीलामी से मिली रकम कर्ज की बकाया राशि से काफी अधिक थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि बैंक ने अतिरिक्त रकम को लंबे समय तक अपने पास रखा और मृत आरोपियों के परिवारों या कानूनी वारिसों तक पहुंचाने का प्रयास नहीं किया।
करोड़ों रुपये अतिरिक्त राशि का मामला
रिपोर्ट के अनुसार, संपत्तियों की नीलामी से बैंक को करीब 3.6 करोड़ रुपये मिले, जबकि बैंक की वास्तविक बकाया राशि इससे काफी कम थी। कर्ज की रकम समायोजित करने के बाद बची राशि अब मृत आरोपियों के परिवारों को मिलने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंक से इस अतिरिक्त राशि के इस्तेमाल और उसे अब तक वापस नहीं करने को लेकर रिपोर्ट मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंक से मांगा जवाब
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि नीलामी से बैंक का पूरा बकाया चुका दिया गया था, तो अतिरिक्त राशि को संबंधित कानूनी वारिसों को लौटाने की जिम्मेदारी बैंक की थी।
अदालत ने बैंक शाखा प्रबंधन से लोन खातों, नीलामी से प्राप्त राशि और अतिरिक्त रकम के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी मांगी है।
आरोपी बैंक अधिकारी को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रही। इसके बाद अदालत ने पूर्व बैंक अधिकारी को राहत देते हुए निचली अदालत और हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया।
कानूनी वारिसों को मिल सकती है राशि
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मृत आरोपियों के परिवारों को अतिरिक्त नीलामी राशि मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान बैंक की रिपोर्ट पर विचार करेगी और अतिरिक्त रकम लौटाने को लेकर निर्देश जारी कर सकती है।
यह फैसला बैंकिंग मामलों में पारदर्शिता और संपत्ति नीलामी से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।