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विदेशी घोषित दो महिलाओं के डिपोर्टेशन पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक

 

नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित की गई दो महिला, सालेहा खातून और सरभानु बेगम, को उनके कथित मूल देश भेजे जाने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने केंद्र सरकार और असम सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है और अगली सुनवाई तक दोनों महिलाओं को डिपोर्ट नहीं करने का निर्देश दिया है।

दोनों महिलाओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाओं में कहा गया है कि असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें विदेशी घोषित कर दिया था, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, दोनों महिलाएं मार्च 2026 से गोलपारा डिटेंशन सेंटर में बंद हैं और उन्हें देश से बाहर भेजे जाने का खतरा है।

मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस वी. मोहना की अवकाशकालीन पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाओं पर प्रारंभिक विचार करने के बाद केंद्र सरकार और असम सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने दोनों सरकारों से महिलाओं के दावों और मामले के तथ्यों पर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि अगर सालेहा खातून और सरभानु बेगम हिरासत में बनी रहती हैं तो उन्हें अगली सुनवाई की तारीख तक डिपोर्ट नहीं किया जाएगा। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी होने और संबंधित पक्षों का जवाब मिलने तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।

इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। उस दिन अदालत सरकारों की ओर से दाखिल जवाबों और याचिकाकर्ताओं के तर्कों पर विस्तार से विचार करेगी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दोनों महिलाओं को राहत मिली है, क्योंकि उन्हें अगली सुनवाई तक देश से बाहर भेजे जाने की आशंका से अस्थायी सुरक्षा मिल गई है।

यह मामला नागरिकता और विदेशी घोषित किए गए व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी सवालों से संबंधित माना जा रहा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट आगे विस्तृत सुनवाई करेगा।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी