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सुप्रीम कोर्ट में बिहार एसआईआर की वैधता पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल

 

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई की। इस प्रक्रिया में मतदाता सूची में शामिल लोगों की नागरिकता की जांच की जा रही है, जिसे कई याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (ईसीआई) ने अपना पक्ष रखा। ईसीआई के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि 2003 में नागरिकता अधिनियम में संशोधन हुआ था, तब किसी ने विरोध नहीं किया और इसे सभी पक्षों का समर्थन मिला था। कोर्ट ने पूछा कि क्या उस संशोधन के बाद ही एसआईआर में नागरिकता जांच की जरूरत पड़ी? ईसीआई ने स्पष्ट किया कि एसआईआर का मुख्य उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत केवल वोटरों की नागरिकता सुनिश्चित करना है।

कोर्ट ने ईसीआई से सवाल किया कि एसआईआर के आदेश में 'माइग्रेशन' शब्द का क्या मतलब है? क्या यह सिर्फ सीमा पर अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए है? ईसीआई ने जवाब दिया कि माइग्रेशन में अंतरराज्यीय और राज्य के भीतर का प्रवासन दोनों शामिल हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा सवाल उठाया कि माइग्रेशन का मतलब वैध प्रवासन होता है। भारत में हर नागरिक को किसी भी राज्य में जाने और रहने का संवैधानिक अधिकार है, इसलिए अंतर-राज्य प्रवासन को अवैध नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर को 'ड्यू प्रोसेस' का उल्लंघन बताते हुए अमेरिकी अदालतों के फैसलों का हवाला दिया। इस पर ईसीआई ने पलटवार किया। वकील ने कहा कि अमेरिका खुद ड्यू प्रोसेस का कितना पालन करता है? उन्होंने उदाहरण दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटाने और ट्रायल के लिए ले जाने की बात करते हैं, साथ ही ग्रीनलैंड पर कब्जे की इच्छा जताते हैं। ऐसे में अमेरिका ड्यू प्रोसेस की बात कैसे कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी। यह सुनवाई बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर और नागरिकता जांच के तरीके को लेकर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे लाखों लोगों का मताधिकार प्रभावित हो सकता है।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी