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प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां चिंतित, वीडियो में बोले- IPS अफसरों का हमला करना दुखद

 

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जब IPS अधिकारी खुद प्रदर्शनकारियों पर हमला करते हुए दिखाई देते हैं, तो यह बेहद दुखद स्थिति है। जस्टिस भुइयां ने पुलिस की कार्यप्रणाली में निष्पक्षता की कमी पर भी सवाल उठाए और पुलिस को अपना रवैया बदलने की जरूरत बताई।

'पुलिस से जिस निष्पक्षता की उम्मीद, वह गायब दिख रही'

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जस्टिस उज्जल भुइयां ने यह टिप्पणी रिटायर IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद की पुस्तक 'पुलिसिंग द रिपब्लिक' के विमोचन कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने पुलिस व्यवस्था और उसकी भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पुलिस से जिस निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है, वह कहीं गायब होती दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि पुलिस को अपने रवैये में बदलाव लाना होगा। जस्टिस भुइयां ने खास तौर पर हिरासत में मौत और फर्जी एनकाउंटर जैसे मामलों को गंभीर अपराध बताया। उनके मुताबिक, कानून लागू करने वाली एजेंसी के तौर पर पुलिस की जवाबदेही और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है।

'हिरासत में मौत और फर्जी एनकाउंटर गंभीर अपराध'

जस्टिस भुइयां ने पुलिस कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों और कानून के पालन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत और फर्जी एनकाउंटर जैसी घटनाएं गंभीर अपराध हैं।उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में अलग-अलग प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव को लेकर बहस चल रही है। पुलिस की भूमिका और प्रदर्शनकारियों के साथ उसके व्यवहार को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

CJP के संसद मार्च से जोड़कर देखा जा रहा बयान

जस्टिस भुइयां के बयान को पिछले दिनों हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दरअसल, CJP की ओर से किए गए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की बात सामने आई थी।प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पैलेट गन चलाने का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि, इस मामले में सामने आए आरोपों और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं। ऐसे में जस्टिस भुइयां की पुलिस के रवैये और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर की गई टिप्पणी को मौजूदा घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है।

पुलिस की निष्पक्षता पर उठाया सवाल

जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का मुख्य फोकस पुलिस की निष्पक्षता और जवाबदेही पर रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इस दौरान कानून और नागरिक अधिकारों का पालन भी जरूरी है।उनके बयान के बाद पुलिसिंग, प्रदर्शनकारियों के अधिकार और बल प्रयोग की सीमाओं को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है। खास तौर पर छात्र और नागरिक आंदोलनों के दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर उठने वाले सवालों के बीच यह टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।फिलहाल जस्टिस भुइयां के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। वहीं, CJP के संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर भी विवाद जारी है।