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सड़कों पर आवारा पशुओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वीडियो में कहा- ये नेचुरल स्पीड ब्रेकर नहीं; हादसों के पीड़ितों को मिले मुआवजा

 

सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर घूमने वाले आवारा पशुओं से होने वाले हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कहा कि पशुओं को नेशनल हाईवे, सड़कों और गलियों में इस तरह खुले में नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि आवारा पशु किसी भी स्थिति में “नेचुरल स्पीड ब्रेकर” नहीं हैं।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए कि वे सड़क हादसों में आवारा पशुओं के कारण घायल होने या जान गंवाने वाले लोगों के लिए मुआवजे की व्यवस्था बनाने पर विचार करें। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर मौजूदा कानूनों और नियमों में संशोधन किया जाए।

आवारा पशुओं से बढ़ रहे सड़क हादसे

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सड़कों पर खुले घूमते पशु न सिर्फ यातायात व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन रहे हैं। कई बार वाहन चालक अचानक सामने आए पशुओं से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मौत तक हो जाती है।कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों का इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति की जान को इस तरह के जोखिम में नहीं डाला जा सकता। आवारा पशुओं की समस्या को केवल स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

केंद्र और राज्य सरकारों से नियम बनाने को कहा

पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी नीति तैयार करें। साथ ही हादसों में प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मौजूदा कानून इस तरह के मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, तो उनमें बदलाव किया जा सकता है। अदालत का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और आम लोगों की जान बचाना है।

जिम्मेदारी तय करने पर जोर

कोर्ट के इस रुख से संकेत मिलता है कि अब आवारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। अक्सर ऐसे हादसों के बाद पीड़ित परिवारों को आर्थिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राज्यों में आवारा पशुओं के प्रबंधन, सड़कों की निगरानी और हादसों के बाद राहत व्यवस्था को लेकर नए नियम बनाए जा सकते हैं।

सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के जरिए स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रशासन की भी अहम भूमिका है। सड़कों पर सुरक्षित माहौल बनाए रखना सरकारों की जिम्मेदारी है। अब केंद्र और राज्य सरकारों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि आवारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों को कम किया जा सके और पीड़ितों को समय पर मदद मिल सके।