×

32 साल पुरानी शादी खत्म, फुटेज में देंखे सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला और पायल को दी तलाक की मंजूरी, आपसी सहमति से सुलझा विवाद

 

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला को तलाक की मंजूरी दे दी। करीब 32 साल पहले विवाह बंधन में बंधे इस दंपति ने अदालत को बताया कि उन्होंने आपसी सहमति से अपने वैवाहिक संबंध समाप्त करने और सभी लंबित विवादों को सुलझाने का फैसला किया है। दोनों वर्ष 2011 से अलग रह रहे थे। यह मामला उस समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जब उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी शादी समाप्त करने से इनकार कर दिया गया था। अब दोनों पक्षों की सहमति के बाद सर्वोच्च अदालत ने विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी।

अनुच्छेद 142 के तहत दाखिल किया था आवेदन

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/EAReHTjTHz8?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/EAReHTjTHz8/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ को बताया कि दोनों पक्षों ने इसी महीने की शुरुआत में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने का संयुक्त आवेदन दायर किया था।अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को "पूर्ण न्याय" सुनिश्चित करने के लिए विशेष परिस्थितियों में व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। इसी प्रावधान के तहत अदालत ने दोनों पक्षों की सहमति को स्वीकार करते हुए तलाक को मंजूरी दी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने समझौते की दी थी सलाह

इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की सलाह दी थी। अदालत ने उम्मीद जताई थी कि दोनों पक्ष गंभीरता से बातचीत करेंगे और लंबित विवादों का समाधान निकालेंगे। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का निर्णय लिया।

दिल्ली के होटल में हुई थी पहली मुलाकात

उमर अब्दुल्ला और पायल की पहली मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में हुई थी, जहां दोनों काम करते थे। इसके बाद दोनों ने विवाह किया। इस दंपति के दो बेटे, जहीर और जमीर, हैं।

एलिमनी को लेकर सुनवाई में हुई थी चर्चा

मामले की पिछली सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में आरोप लगाया था कि पायल अब्दुल्ला तलाक देने के पक्ष में नहीं हैं और उन्होंने 300 करोड़ रुपये की एलिमनी (गुजारा भत्ता) की मांग की है।हालांकि, अब दोनों पक्षों ने अदालत को सूचित किया कि वे आपसी सहमति से सभी विवादों का निपटारा कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में अंतिम समझौते के विशिष्ट वित्तीय प्रावधानों का सार्वजनिक विवरण नहीं दिया गया है।

लंबे समय से चल रहा था कानूनी विवाद

उमर अब्दुल्ला और पायल के बीच वैवाहिक विवाद कई वर्षों से अदालत में लंबित था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ यह कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई। अदालत का निर्णय दोनों पक्षों की सहमति और उनके संयुक्त अनुरोध के आधार पर आया है, जिससे लंबे समय से चल रहे इस पारिवारिक विवाद का पटाक्षेप हो गया।