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सुपर अलनीनो का असर, वीडियो में जाने 20 दिन में चीनी 10% और दूध 6% महंगा, जून 2027 तक फसलों पर संकट की आशंका

 

सुपर अलनीनो के संभावित प्रभाव को लेकर खाद्य उद्योग की चिंता बढ़ने लगी है। खाने-पीने की जरूरी चीजों की कीमतों में पिछले 20 दिनों के दौरान तेजी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में चीनी 10.16 प्रतिशत, दूध 6.12 प्रतिशत, दालें 4.68 प्रतिशत और आटा 6.67 प्रतिशत तक महंगे हो चुके हैं। यदि मौसम का प्रतिकूल असर लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले महीनों में कृषि उत्पादन और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मौसम के पूर्वानुमान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। दी गई जानकारी के अनुसार, सुपर अलनीनो का प्रभाव दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है और इसका असर अगली गर्मियों के आखिर तक बने रहने की आशंका है। ऐसे में जून 2027 तक कुछ प्रमुख फसलों का उत्पादन प्रभावित होने का जोखिम जताया जा रहा है। हालांकि, उत्पादन और कीमतों पर वास्तविक असर मौसम की परिस्थितियों, फसलों की स्थिति और सरकारी उपायों पर निर्भर करेगा।

क्या है सुपर अलनीनो और क्यों बढ़ रही चिंता?

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अलनीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान में सामान्य से अधिक वृद्धि से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका प्रभाव दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश और तापमान के पैटर्न पर पड़ सकता है। भारत में अलनीनो की कुछ परिस्थितियां मानसून को कमजोर कर सकती हैं, लेकिन हर बार इसका असर एक जैसा नहीं होता।सुपर अलनीनो शब्द का इस्तेमाल अत्यधिक मजबूत अलनीनो परिस्थितियों के लिए किया जाता है। यदि मानसून या सर्दियों की बारिश सामान्य से कम रहती है, तो खेती के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे फसलों की बुवाई, सिंचाई और पैदावार पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

चना और गन्ने की फसल पर दबाव की आशंका

इंडियन पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिमल कोठारी ने 2027 के कृषि परिदृश्य को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे जैसी स्थिति रबी सीजन में चने की फसल के लिए चुनौती बन सकती है।चना देश में दालों की आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि इसकी पैदावार कम होती है, तो बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर दालों की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है। इसी तरह, गन्ने की फसल पर प्रतिकूल मौसम का असर पड़ने से चीनी उत्पादन को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है।

सोयाबीन और मूंगफली की पैदावार पर भी खतरा

श्री रेणुका शुगर्स के निदेशक अतुल चतुर्वेदी ने सोयाबीन और मूंगफली की पैदावार पर गंभीर खतरे की आशंका जताई है। इन तिलहनी फसलों का उत्पादन प्रभावित होने पर खाद्य तेलों की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, फसलों को होने वाला वास्तविक नुकसान मौसम और कृषि क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है असर

चीनी, दूध, दाल और आटा रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुएं हैं। इनकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से परिवारों के मासिक बजट पर असर पड़ सकता है। खासकर कम आय वाले परिवारों के लिए खाद्य महंगाई अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है।फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि मौसम का संभावित असर कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को किस हद तक प्रभावित करेगा। आने वाले महीनों में मानसून, बारिश, मिट्टी में नमी और फसलों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। साथ ही, कीमतों में तेजी के दावों और सुपर अलनीनो के पूर्वानुमान की आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि भी महत्वपूर्ण है।