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सुखेंदु शेखर ने टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता के साथ ही राज्यसभा से भी दिया इस्तीफा

 

कोलकाता, 8 जून (आईएएनएस)। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने का सिलसिला जारी है। अब टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा है। सुखेंदु शेखर ने टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दिया है।

सुखेंदु शेखर की ओर से बयान जारी कर कहा, "हाल ही में हुए चुनावों में बंगाल के मतदाताओं ने 15 वर्षों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर पूर्ण अविश्वास व्यक्त किया। मतदाताओं ने पार्टी के व्यापक भ्रष्टाचार, महिलाओं पर हो रहे घोर दमन और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में फैली घोर विफलता और अराजकता को नकार दिया।"

सुखेंदु शेखर ने आगे कहा, "जनता ने बंगाल के इतिहास में पहली बार भाजपा को भारी बहुमत से विजयी बनाया है। नव निर्वाचित जन सरकार ने अपने घोषित चुनावी घोषणापत्र के अनुसार बंगाल के समग्र विकास और पुनर्निर्माण के उद्देश्य से कई कार्यक्रमों को लागू करने का कार्य शुरू कर दिया है। जनता के इस ऐतिहासिक फैसले को स्वीकार करते हुए, मैं तृणमूल कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।

इसके पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राज्य सचिव मोहम्मद अजमल सिद्दीकी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। आईएएनएस से बातचीत के दौरान अजमल सिद्दीकी ने कहा, "इस्तीफा देने के बाद मैं बहुत स्वतंत्र महसूस कर रहा हूं। अब मैं काफी हल्का और आराम महसूस कर रहा हूं।"

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर अल्पसंख्यक समुदाय के हितों के लिए काम करने की कोई वास्तविक गुंजाइश नहीं है। उनके अनुसार, "यहां अल्पसंख्यकों के लिए कोई काम करने नहीं दिया जाता। उनके लिए कोई ठोस काम भी नहीं होता, सिर्फ लॉलीपॉप दिया जाता है। यही वजह है कि मैं इस पद पर नहीं रहना चाहता था।"

अजमल सिद्दीकी ने कहा, "लोगों को धमकाया गया और उनका इस्तेमाल किया गया, लेकिन मुझे सुवेंदु अधिकारी से उम्मीद है कि वह हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को साथ लेकर चलेंगे और बंगाल को सही दिशा में आगे बढ़ाएंगे।"

अजमल सिद्दीकी ने दावा किया कि वर्ष 2015-16 में उन पर टीएमसी में शामिल होने का दबाव बनाया गया था। उन्होंने कहा, "हम व्यवसाय कर रहे थे। अभिषेक बनर्जी की ओर से बिनॉय मिश्रा ने हमसे पैसे मांगे। हमने पैसे नहीं दिए तो हमारे खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया। इसके बाद हमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से जमानत लेनी पड़ी थी। हम अभिषेक बनर्जी के डर की वजह से पार्टी में शामिल हुए थे।"

--आईएएनएस

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