सूडान में आरएसएफ ने मानवता को किया शर्मसार: एमनेस्टी इंटरनेशनल
खार्तूम, 1 जुलाई (आईएएनएस)। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) को सूडान के एल फाशेर शहर पर किए क्रूर हमलों को शर्मसार करने वाला करार दिया है। आरोप लगाया कि उत्तरी दारफुर के एल फाशेर शहर पर कब्जे के दौरान आरएसएफ ने 'एथनिक क्लीजिंग' की भयावह वारदात को अंजाम दिया।
बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में एमनेस्टी ने कहा कि हत्या, यातना, बलात्कार, गुलामी और यौन दासता जैसे अपराध नागरिकों के खिलाफ व्यापक और सुनियोजित हमले का हिस्सा थे, जो मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरएसएफ ने एल फाशेर पर हमलों के दौरान बच्चों को भी जानबूझकर निशाना बनाया।
अक्टूबर 2024 के अंत में आरएसएफ ने करीब 18 महीने की घेराबंदी के बाद एल फाशेर पर कब्जा कर लिया था। यह दारफुर क्षेत्र में सूडानी सेना का अंतिम प्रमुख गढ़ था। इस कब्जे के दौरान बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ, जिसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं।
फरवरी 2025 में संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र तथ्य-जांच मिशन ने भी कहा था कि एल फाशेर पर आरएसएफ का कब्जा गैर-अरब समुदायों के खिलाफ नरसंहार के संकेत दिखाता है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 247 लोगों से बातचीत की, जिनमें संघर्ष से बचे 208 लोग शामिल थे। संगठन ने दस्तावेजों, वीडियो और उत्तरी दारफुर की उपग्रह तस्वीरों का भी विश्लेषण किया।
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के मध्य से 2025 के अंत तक आरएसएफ ने एल फाशेर और आसपास के इलाकों में युद्ध अपराध किए। संगठन ने दावा किया कि आरएसएफ ने कई बार गैर-अरब नागरिकों को निशाना बनाया और हमलों के दौरान उनके लिए अपमानजनक तथा अमानवीय भाषा का इस्तेमाल किया। एमनेस्टी ने निष्कर्ष निकाला कि जातीय आधार पर उत्पीड़न भी मानवता के खिलाफ अपराध है।
सूडान में गृहयुद्ध अप्रैल 2023 में उस समय शुरू हुआ था, जब सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल-बुरहान और आरएसएफ प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान दागालो (हेमेदती) के बीच सत्ता संघर्ष हिंसक संघर्ष में बदल गया।
इस युद्ध में अब तक लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने तत्काल युद्धविराम लागू करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की मांग की है। संगठन की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा कि "अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल चिंता जताने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे और दंड से बचने की संस्कृति को खत्म करना होगा।"
--आईएएनएस
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