दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर सख्ती: 1 नवंबर से निर्माण और डिमोलिशन के कई कामों पर रोक, जानें क्या बदलेगा
दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। दिल्ली सरकार की शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत 1 नवंबर 2026 से धूल पैदा करने वाली डिमोलिशन गतिविधियों और खुले स्थानों पर होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लागू करने की जानकारी सामने आई है। यह व्यवस्था 31 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित है। हालांकि, जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित छूट मिल सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े इन कदमों का उद्देश्य निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और सड़कों पर प्रदूषण के स्तर को कम करना है। अधिकारियों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माण और तोड़फोड़ के किन कामों पर रोक?
प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत धूल पैदा करने वाली डिमोलिशन गतिविधियों और खुले स्थानों पर होने वाले सिविल निर्माण कार्यों को रोकने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार छूट हो सकती है।
निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव, धूल रोकने वाले उपकरणों का इस्तेमाल और निर्माण सामग्री को ढककर रखना जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण नियमों के पालन की निगरानी करेगा। जिन निर्माण स्थलों पर निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे के उचित निपटान पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि सड़कों और खुले क्षेत्रों में धूल न फैले।
GRAP के तहत भी लागू हैं प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के अलग-अलग चरण लागू करता है। इसके तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर अतिरिक्त पाबंदियां लगाई जाती हैं।
21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 दर्ज होने के बाद GRAP का पहला चरण लागू किया गया था। इस चरण में होटल और रेस्तरां के तंदूरों में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक और डीजल जनरेटर के उपयोग पर निर्धारित प्रतिबंध शामिल हैं। लोगों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद
सर्दियों में कम हवा, तापमान में गिरावट और प्रदूषकों के वातावरण में जमा होने के कारण दिल्ली-NCR की हवा अक्सर खराब हो जाती है। निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल भी प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।ऐसे में निर्माण स्थलों पर सख्ती, सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी से वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर मौसम और दूसरे प्रदूषण स्रोतों पर भी निर्भर करेगा।