स्पेन में स्नैप इलेक्शन का पीएम सांचेज ने किया ऐलान, जानें वजह क्या?
मैड्रिड, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्पेन में स्नैप इलेक्शन का ऐलान कर दिया गया है। 29 नवंबर की तारीख तय की गई है। प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सोमवार शाम टेलीविजन संदेश के जरिए इसका ऐलान किया। देश की जनता होम क्राइसिस को ठीक से न डील कर पाने को लेकर खफा थी। 87 साल की महिला को उनके घर से निकालने की एक नाकाम कोशिश ने स्पेन में आंदोलन खड़ा कर दिया। सांचेज ने मान लिया है कि वो स्थिति को ठीक से संभाल नहीं पाए।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने स्पेन सरकार के मुख्यालय 'ला मोनक्लोआ' से एक आधिकारिक भाषण दिया और घोषणा की कि 29 नवंबर को स्नैप इलेक्शन कराए जाएंगे।
सांचेज ने माना कि उनकी सरकार से "गलतियां हुई हैं" और वे उन सभी कामों को पूरा नहीं कर पाए जो उन्होंने करने का लक्ष्य रखा था। सप्ताहांत में अपनी कैबिनेट के सदस्यों, अपनी पार्टी 'स्पेनिश सोशलिस्ट पार्टी' (पीएसओई) के नेताओं और दूसरे राजनीतिक समूहों के सहयोगियों के साथ लंबी बातचीत के बाद, उन्होंने तय किया कि वे संसद को उसके तय कार्यकाल के खत्म होने से नौ महीने पहले ही भंग कर देंगे—जबकि अब तक उनका इरादा कार्यकाल पूरा करने का ही था।
प्रमुख स्पेनिश मीडिया आउटलेट अल पाइस के अनुसार, सोमवार को अपने भाषण में उन्होंने कहा, "तीन साल से भी पहले, मतदाताओं ने एक बार फिर एक प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर भरोसा जताया था। हमें अभूतपूर्व आपातकालीन स्थितियों का सामना करना पड़ा और बेहद मुश्किल अंतरराष्ट्रीय माहौल से निपटना पड़ा। हमें एक ऐसी कांग्रेस (संसद) के साथ काम करना पड़ा जो बहुत टकराव वाली थी। हमें से प्रभावशाली लोगों का सामना करना पड़ा जो चुनाव तो नहीं लड़ते, लेकिन हमारे देश को नियंत्रित करना चाहते हैं। और हमें इतिहास के सबसे खराब विपक्ष का सामना करना पड़ा, जो देश के लिए अच्छी नीतियों को रोकता है और अलग-अलग क्षेत्रों से उन्हें नाकाम करने की कोशिश करता है।"
उन्होंने आगे कहा, "इन सबके बावजूद, स्पेन आगे बढ़ता रहा है। यह ईयू (यूरोपीय संघ) में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। फ्रांस या जर्मनी की तुलना में यहां लोगों की खरीदने की क्षमता तीन गुना ज्यादा बढ़ी है। हमने स्कॉलरशिप, माता-पिता की छुट्टी (पैरेंटल लीव), आश्रितों के लिए लाभ और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया है।"
प्रधानमंत्री ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "अभी भी कई सामाजिक अन्याय दूर करने हैं और सार्वजनिक सेवाओं व आवास के क्षेत्र में कई लक्ष्य हासिल करने बाकी हैं। सच तो यह है कि और काम करने के लिए हमें लोगों के समर्थन की जरूरत है; हमें संसद में एक बहुत बड़े प्रगतिशील बहुमत की जरूरत है। इसीलिए, किंग को सूचित करने के बाद, मैंने 29 नवंबर को चुनाव कराने के लिए कैबिनेट की एक विशेष बैठक बुलाने का फैसला किया है। अब यह आप पर निर्भर है। दुनिया एक बहुत जटिल दौर में प्रवेश कर रही है।"
सांचेज का यह फैसला स्पेन में आवास संकट को लेकर देश भर में एक हफ्ते से ज्यादा समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है। मैड्रिड में 87 साल की मारिकार्मेन अबास्कल को उनके घर से निकाले जाने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। इस घटना ने बढ़ते किराए, लोगों को घरों से बेदखल करने और सस्ते घरों की भारी कमी को लेकर जनता के गुस्से को और भड़का दिया।
ये प्रदर्शन बार्सिलोना, वालेंसिया, सेविल और मालागा समेत 50 से ज्यादा शहरों में फैल गए। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, और कार्यकर्ताओं ने मैड्रिड के बीचों-बीच विरोध प्रदर्शन के लिए कैंप भी लगाए हैं। इन प्रदर्शनों की तुलना '15-एम' आंदोलन (किफायती उपायों के खिलाफ आंदोलन) से की जा रही है।
कांग्रेस (संसद) द्वारा किरायेदारों की सुरक्षा मजबूत करने वाले दो आदेशों को खारिज करने के बाद विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए। 'जंट्स पर कैटालोनिया' (कैटालोनिया के लिए एकजुट) ने इन दोनों उपायों का विरोध किया और 'पॉपुलर पार्टी' (पीपी) तथा 'वॉक्स' (वीओएक्स) के साथ मिल गई, जबकि सरकार ने कैटालोनिया की अलगाववादी पार्टी के साथ इन आदेशों की कुछ बातों पर बातचीत भी की थी।
संसद में मिली इस हार ने सांचेज की स्थिति को कमजोर कर दिया है। पीएम के पास अब ऐसा बहुमत नहीं है जिससे वे कोई अहम कानून पास करा सकें। इससे प्रधानमंत्री की उस योजना को भी झटका लगा जिसके तहत वे मौजूदा कार्यकाल का पहला पूरा बजट पेश करना चाहते थे। इस बजट के जरिए वे संसदीय समूहों के साथ बातचीत करने की इच्छा दिखाना चाहते थे, भविष्य के सामाजिक उपायों का रोडमैप बनाना चाहते थे और अपने कार्यकाल को कुछ और महीनों के लिए बढ़ाना चाहते थे।
वर्तमान संकट से पहले स्यूटा संकट ने भी सरकार की किरकिरी कराई थी। जब मोरक्को से 80,000 से अधिक लोग स्पेन के इस अलग-थलग पड़े शहर में घुस आए थे। प्रवासियों की भारी आमद ने एक ऐसे मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे में सबसे ऊपर ला दिया, जिसे विश्लेषक आम तौर पर दक्षिणपंथी पार्टियों के लिए फायदेमंद मानते हैं।
हालांकि हाउसिंग क्राइसिस यानी घरों से जुड़े मुद्दे का असर इसके ठीक उलट रहा है। ओपिनियन पोल बताते हैं कि अधिकतर स्पेनिश लोग (जिनमें दक्षिणपंथी विचारधारा वाले वोटर भी बड़ी संख्या में शामिल हैं) उन नीतियों का समर्थन करते हैं जिनकी वकालत पारंपरिक रूप से वामपंथी पार्टियां करती रही हैं। इनमें किराया सीमित करने का भी अहम प्वाइंट शामिल है। सांचेज की पार्टी का मनोबल गिरा हुआ है।
इसके उलट, दक्षिणपंथी खेमे में उत्साह का माहौल है। खासकर स्यूटा माइग्रेशन संकट से सरकार को हुए भारी राजनीतिक नुकसान से उत्साहित, पीपी और वॉक्स दोनों को पूरा भरोसा है कि इस बार जीत उनके हाथ से नहीं निकलेगी। अगर चुनाव के बाद उन्हें संसद में बहुमत मिल जाता है, तो सत्ता का संतुलन उनके हाथ में होगा।
एक और बड़ी वजह जिसने सोशलिस्ट नेता को लगातार कमजोर किया है, वह है कई कानूनी लड़ाइयां। कुछ मामलों में बहुत कम विवाद हुआ, जैसे कि भ्रष्टाचार के आरोपों में पूर्व परिवहन मंत्री और पीएसओई के बड़े नेता जोस लुइस अबालोस को दोषी ठहराया जाना और पार्टी कार्यकर्ता लेइरे डिएज से जुड़े कथित प्रभाव-दलाली नेटवर्क की जांच। वहीं, कुछ मामले काफी ज्यादा विवादित रहे, जिनमें सांचेज की पत्नी और भाई के खिलाफ दर्ज मामले और पूर्व अटॉर्नी जनरल अल्वारो गार्सिया ओर्टिज को दोषी ठहराए जाने वाला मुकदमा शामिल हैं।
--आईएएनएस
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