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एसपी वैद ने चीन की दादागिरी पर आईटीबीपी डीजी के बयान को बताया सही, बोले-भारत उसी की भाषा में देता है जवाब

 

जम्मू-कश्मीर, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ फेस-ऑफ, सीमा विवाद पर पूर्व सेना प्रमुख के बयान और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के आह्वान समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीति का समर्थन किया और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को लेकर भी बड़ा बयान दिया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा, "आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी है। उनका कहने का मतलब यह है कि फेस-ऑफ हो रहा है, क्योंकि चीन और उसकी पीएलए धमकाने वाला व्यवहार करते हैं। चीन अपने लगभग सभी पड़ोसी देशों पर दबाव बनाने की कोशिश करता है और उनकी जमीन पर दावा करता रहता है। आपने लद्दाख में भी कुछ वर्ष पहले ऐसी घटनाएं देखी थीं। इसी तरह की गतिविधियां वे समय-समय पर करते रहते हैं।"

उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है। भारत उनकी भाषा समझता है और उसी भाषा में जवाब भी देता है। आईटीबीपी डीजी का यही आशय था। मैं समझता हूं कि वहां हमारे आईटीबीपी के बहादुर जवान पूरी तरह से अपनी जमीन की सुरक्षा कर रहे हैं।

एसपी वैद ने कहा कि चीन कभी स्थानों के नाम बदलता है, कभी कोई और प्रयास करता है, इसलिए उसे उसी की भाषा में जवाब देना पड़ेगा। यही भारत सरकार की नीति है और डीजी आईटीबीपी ने भी वही बात कही है।

उन्होंने कहा कि इस पर कांग्रेस ने मुद्दा उठाया, लेकिन कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि 1962 में जब चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा किया था और भारत के साथ युद्ध हुआ था, तब कांग्रेस की ही सरकार थी। यदि इन्हें याद हो, तो पंडित नेहरू ही उस समय प्रधानमंत्री थे। अक्साई चिन का पूरा क्षेत्र उनके समय में चीन के कब्जे में चला गया था।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी ने कहा कि इसी प्रकार सीसीपी और कांग्रेस के बीच जो समझौता किया गया था, उसके बारे में आज तक देश को पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए इस विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाने की आवश्यकता नहीं है। हां, चीन कोशिशें करता रहता है, लेकिन भारत की बहादुर सेना और आईटीबीपी उसका जवाब देते रहते हैं। अगर कोई गोलीबारी हुई होती या भारतीय भूमि पर कब्जा हुआ होता, तो संसद में हमारे रक्षा मंत्री या प्रधानमंत्री ने उस पर बयान दिया होता।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि जो लोग सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं, उन्हें हिंसा करने के बजाय जनता का विश्वास जीतना चाहिए। लड़ाई बैलेट से होगी, बुलेट से नहीं। जो दृश्य आप फ्रांस में देखते हैं, वे भारत में नहीं होंगे। प्रधानमंत्री मोदी का आशय यही था।

उन्होंने कहा कि तीसरा प्रश्न मनोज मुकुंद नरवणे के भारत-चीन सीमा विवाद पर दिए गए बयान को लेकर था। उनका बयान बहुत संतुलित और समझदारी भरा था। उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा। मुकुंद नरवणे का कहना था कि यह मुद्दा बातचीत से ही हल होगा।

एसपी वैद ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि भारत-चीन सीमा का विवाद पुराना है। चीन उसे हल नहीं करना चाहता, क्योंकि वह समय-समय पर अपनी रणनीति के तहत धीरे-धीरे जमीन पर दबाव बनाता रहता है। भारत का कहना है कि व्यापार और अन्य विषय बाद में हो सकते हैं, लेकिन पहले सीमा विवाद का समाधान होना चाहिए और उसका समाधान बातचीत से ही निकलेगा। नरवणे साहब का आशय भी यही था।

उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण ने 23 अक्टूबर को देशव्यापी "लोकतंत्र बचाओ दिवस" मनाने का आह्वान किया है। प्रशांत भूषण कहते हैं कि वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। सत्ता परिवर्तन करना है तो जनता का विश्वास जीतिए, उनसे वोट लीजिए। सड़कों पर आगजनी और अराजकता फैलाकर यह नहीं किया जा सकता। भारत में यह स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए उन्हें मैं केवल इतनी सलाह दूंगा कि आप 23 अक्टूबर से जो भी अभियान चलाना चाहते हैं, उसे शांतिपूर्ण ढंग से चलाइए, लेकिन यदि हिंसा होगी तो दंगाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रधानमंत्री का निर्देश है और गृह मंत्री इसी संदर्भ में बात कर रहे थे। उन्होंने हमारे सामने लक्ष्य रखा है कि 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाया जाए।

एसपी वैद ने कहा कि मेरा मानना है कि इस लक्ष्य के लिए हम सबका सहयोग आवश्यक है। हर देशवासी की जिम्मेदारी है कि देश को नशे की समस्या से बचाया जाए। जिस प्रकार ड्रग कार्टेल और तस्करी नेटवर्क नशे का कारोबार फैलाते हैं, उसे रोकना होगा। इसके लिए सभी राज्य सरकारों, खुफिया एजेंसियों, पुलिस बलों और अन्य संबंधित संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। साथ ही हर नागरिक की भी भूमिका होगी। इसलिए ड्रग माफिया, ड्रग तस्करों और नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि पूरे समाज और परिवारों को "ऑल गवर्नमेंट, ऑल सोसायटी" दृष्टिकोण अपनाकर नशे के खिलाफ मुहिम चलानी होगी, ताकि 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में प्रभावी प्रगति की जा सके।

--आईएएनएस

केके/वीसी