Sonia Gandhi Interview: सोनिया गांधी ने अपनी किताब में खोले जिंदगी के कई राज, मोदी सरकार पर साधा निशाना, बोलीं- राजीव से मिलने के 60 साल बाद भी नहीं बदली
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी जल्द ही अपनी किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के जरिए अपनी जिंदगी से जुड़े कई अनकहे किस्से दुनिया के सामने लाने जा रही हैं। 10 नवंबर को लॉन्च होने वाली इस किताब में उन्होंने इटली से भारत आने, राजीव गांधी के साथ अपनी प्रेम कहानी, गांधी परिवार से मिले अनुभव और भारतीय राजनीति में अपने लंबे सफर को विस्तार से बताया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने अपनी निजी जिंदगी के साथ-साथ देश की राजनीति, आपातकाल, कांग्रेस की मौजूदा स्थिति और मोदी सरकार को लेकर भी खुलकर अपनी राय रखी।
सोनिया गांधी ने कहा कि राजीव गांधी से मुलाकात के करीब 60 साल बाद भी वह मूल रूप से वैसी ही इंसान हैं, जैसी पहले थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब वह पहले की तरह ज्यादा मुस्कुराती और हंसती नहीं हैं। उनके मुताबिक, राजीव गांधी और इंदिरा गांधी से उन्होंने भारत, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और जिम्मेदारियों को निभाने का महत्व सीखा।
राजीव गांधी के साथ प्रेम कहानी से जुड़ी यादें कीं साझा
सोनिया गांधी ने अपनी किताब को सिर्फ राजीव गांधी के साथ प्रेम कहानी तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यह उस सफर की कहानी भी है, जिसमें उन्हें राजीव के परिवार और भारत से प्यार हो गया। धीरे-धीरे वह इस परिवार और देश का हिस्सा बन गईं।
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन में आने का फैसला भी उन्होंने उस समय लिया, जब उन्हें लगा कि गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी के संघर्षों तथा बलिदानों का उद्देश्य खतरे में पड़ रहा है। पार्टी की कमजोर होती स्थिति को देखते हुए उन्हें लगा कि अब उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
इंदिरा गांधी और आपातकाल पर क्या बोलीं सोनिया?
आपातकाल के मुद्दे पर सोनिया गांधी ने कहा कि उस समय वास्तव में क्या हो रहा था और परिस्थितियों की गंभीरता कितनी थी, इसकी जानकारी उन्हें आपातकाल खत्म होने के बाद मिली। उन्होंने माना कि उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाया गया और बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी Habeas Corpus के अधिकार को निलंबित कर दिया गया था।
हालांकि, उन्होंने इंदिरा गांधी के नजरिए से उस दौर की परिस्थितियों को समझने की कोशिश भी की। सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी तेजी से बिगड़ते हालात से निपटने के लिए संघर्ष कर रही थीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला लिया था और बाद में आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर खेद जताते हुए माफी भी मांगी थी।
मोदी और मेरी भारत को लेकर सोच अलग: सोनिया गांधी
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपनी विचारधारा के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मोदी और उनकी भारत को लेकर सोच बिल्कुल अलग है। RSS और BJP की राजनीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को RSS से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद भी संस्थाओं को दोबारा स्वस्थ स्थिति में लाने में समय लगेगा और इसके लिए राजनीतिक दलों को लगातार प्रयास करने होंगे।
हालांकि, उन्होंने देश के भविष्य को लेकर उम्मीद जताई। सोनिया गांधी ने कहा कि लोग अब हो रहे नुकसान को समझने लगे हैं और उन्हें भरोसा है कि भारतीय जनता सुशासन की वापसी का स्वागत करेगी।
2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने के फैसले पर क्या कहा?
सोनिया गांधी ने 2004 में UPA की जीत के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के अपने फैसले पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी इस बात का अफसोस नहीं हुआ और न ही उनके मन में यह सवाल आया कि अगर वह प्रधानमंत्री बनतीं तो सरकार की नीतियां कैसी होतीं।
उनके मुताबिक, उस समय सरकार और पार्टी की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से बंटी हुई थीं। डॉ. मनमोहन सिंह सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि वह कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभा रही थीं। उन्होंने इस व्यवस्था को कुल मिलाकर सकारात्मक अनुभव बताया।
कांग्रेस के भविष्य को लेकर सोनिया गांधी ने जताया भरोसा
कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर सोनिया गांधी ने निराशा जताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों को समान अवसर वाला राजनीतिक माहौल नहीं मिला है।
उन्होंने चुनाव आयोग, मुख्यधारा की मीडिया और आर्थिक संसाधनों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। सोनिया गांधी के मुताबिक, तमाम चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस पार्टी संघर्ष कर रही है और उसके कार्यकर्ता संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर काम कर रही है और पार्टी की राजनीतिक संभावनाएं बेहतर हो रही हैं।
सोनिया गांधी की किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' 10 नवंबर को लॉन्च होने वाली है। इस किताब के जरिए पाठकों को उनके निजी जीवन, राजीव गांधी के साथ रिश्ते, गांधी परिवार के अनुभवों और भारतीय राजनीति के कई अहम दौर को उनके नजरिए से समझने का मौका मिलेगा।