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‘सोनार बांग्ला’ का सपना फिर होगा साकार, बंगाल में नया माहौल दिख रहा : रामचंद्र दास

 

कोलकाता, 12 अगस्त (आईएएनएस)। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की धार्मिक और सामाजिक स्थिति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने मां काली की पवित्र भूमि को नमन करते हुए कहा कि बंगाल न्याय, भक्ति और ज्ञान की भूमि रही है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इसी धरती से दुनियाभर में यात्रा कर हिंदू धर्म और भारत का पक्ष रखा था।

आईएएनएस से बातचीत में रामचंद्र दास ने कहा कि पहले जब वह बंगाल आते थे तो उन्हें ऐसा महसूस होता था कि वे अपने ही घर के ऐसे हिस्से में आ गए हैं, जहां लोगों को परेशानियों और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि हिंदू समुदाय को त्योहारों, उत्सवों और धार्मिक आयोजनों के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हाल के दौरे में कोलकाता की सड़कों पर उन्हें अलग माहौल देखने को मिला। उनके अनुसार, शहर के कई हिस्सों में केसरिया झंडे दिखाई दे रहे हैं, जिसे वह एक नए संदेश के रूप में देख रहे हैं।

बंगाल की पूर्व सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हिंदुओं ने कथित तौर पर यातनाएं झेली हैं। लोगों ने ऐसी सरकार को हटाने और सुवेंदु अधिकारी को सत्ता में लाने का संकल्प लिया। सुवेंदु अधिकारी जिस लगन के साथ बंगाल की सेवा कर रहे हैं, उससे एक बार फिर ‘सोनार बांग्ला’ का सपना पूरा होने की उम्मीद है।

रोजगार और पलायन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि मैं पिछले दो दिनों से कोलकाता में हूं और इस दौरान उन्होंने राज्य के लोगों से जुड़े कई मुद्दों को महसूस किया है। लंबे समय से लोगों की अनदेखी किए जाने के कारण कई लोगों को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर जाना पड़ा है। राज्य के मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी काम करने की जरूरत है। बंगाल को देश की मुख्यधारा से जोड़ने और सनातन संस्कृति एवं परंपराओं को मजबूत करने की आवश्यकता है, जिससे बंगाल के हिंदू स्वतंत्र और खुशहाल तरीके से अपनी संस्कृति और परंपराओं का पालन कर सकें, जिसमें भगवती और मां काली की पूजा भी शामिल है।

रामचंद्र दास ने आगामी धार्मिक आयोजन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ, उज्जैन कुंभ, नासिक कुंभ और हरिद्वार कुंभ के आयोजन देखे हैं। अब कोलकाता की धरती पर भी भव्य यज्ञ के जरिए एक बड़े धार्मिक आयोजन का अनुभव देखने को मिलेगा। अयोध्या में 500 वर्षों के बाद राम मंदिर का निर्माण हुआ और अब कोलकाता में अपने गुरुदेव जगद्गुरु रामभद्राचार्य का जन्मदिवस मनाने की योजना है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों को लाया जाएगा और भव्य यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन के जरिए बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम