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सोनम वांगचुक के 'तिब्बत' वाले बयान पर मचा बवाल, सेंट्रल तिब्बत एडमिनिस्ट्रेशन बोला- 'आपको चीन के दमन की खबर नहीं'

 

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत सोनम वांगचुक के 24 सितंबर को लेह में दिए भाषण से हुई। उन्होंने पिछले साल की लेह हिंसा का जिक्र करते हुए कहा था कि लद्दाख में ऐसी ज्यादती हो रही है, जो उनके अनुसार चीन भी तिब्बत में नहीं कर रहा। उन्होंने लद्दाख के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा की मांग दोहराई।

इसके बाद Central Tibetan Administration (CTA) ने वांगचुक के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। CTA के प्रवक्ता तेनजिन लेक्शे ने कहा कि लद्दाख की स्थिति की तुलना तिब्बत से करना “गलत और वास्तविकता से परे” है। CTA का कहना है कि तिब्बत में चीन के शासन के तहत तिब्बतियों के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े गंभीर मुद्दे अब भी मौजूद हैं।

वांगचुक ने बाद में अपने बयान का संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मकसद तिब्बती लोगों की पीड़ा को कमतर आंकना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह चीन के दमन का हमेशा विरोध करते रहे हैं, लेकिन पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा और उसके बाद की घटनाओं के संदर्भ में उन्होंने यह तुलना की थी। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस तुलना से किसी को ठेस पहुंची हो तो खेद भी जताया।

पिछले साल 24 सितंबर को लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था, जिसमें पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई थी। इस घटना की न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी वांगचुक ने दोहराई है।यानी अब विवाद सिर्फ लद्दाख के मुद्दे तक सीमित नहीं है—सोनम वांगचुक की तिब्बत से की गई तुलना पर तिब्बती प्रशासन की सार्वजनिक आपत्ति ने इस बयान को नया राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ दे दिया है।