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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : जब पीएम मोदी ने कहा था- मेरे जीवन का लक्ष्य सोमनाथ का पुनर्निर्माण

 

नई दिल्ली, 8 जनवरी (आईएएनएस)। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व गुरुवार से शुरू हो गया है, जो ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की 75वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। इसके साथ ही पूरे साल होने वाले कई आध्यात्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों की शुरुआत भी हो गई है।

मोदी आर्काइव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 2001 के एक प्रोग्राम की पुरानी तस्वीरें शेयर की हैं, जब मंदिर ने अपनी स्वर्ण जयंती मनाई थी और उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी कार्यक्रम में मौजूद थे। यह कार्यक्रम उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की देखरेख में हुआ था।

मोदी आर्काइव ने शेयर किया कि 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ मंदिर में एक ऐतिहासिक सभा हुई। इस कार्यक्रम में ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा के सालभर चले स्वर्ण जयंती समारोह का समापन हुआ। यह तारीख सरदार पटेल की जयंती के साथ भी मेल खाती थी, वही लौह पुरुष जिन्होंने 1951 में सबसे पहले सोमनाथ मंदिर के रेनोवेशन की योजना बनाई थी।

पोस्ट में आगे बताया गया कि 1026 में सोमनाथ का मंदिर ध्वस्त किया गया था। सोमनाथ मंदिर के भीतर भारत की आत्मा है। सोमनाथ का मंदिर पौराणिक काल से भारत की संस्कृति, श्रद्धा और समृद्धि का प्रतीक रहा है। यह भूमि द्वादश ज्योतिर्लिंग दादा सोमनाथ की एक दिव्य भूमि के रूप में प्रचलित पवित्र भूमि है। सोमनाथ मंदिर राष्ट्र के स्वाभिमान को जागरुक करने वाली भव्य कृति है।

इस कार्यक्रम में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद और कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जैसे दिग्गजों के विजन को याद किया, जिनके समर्पण और लगन से सोमनाथ का पुनर्निर्माण संभव हो पाया।

एक भावुक भाषण देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सोमनाथ मंदिर देश की आत्मा को दर्शाता है और उन्होंने उन 'वीरों' को भी याद किया, जिन्होंने विदेशी हमलावरों से 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहले ज्योतिर्लिंग को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

उन्होंने कहा कि मेरे जीवन का लक्ष्य सोमनाथ का पुनर्निर्माण है। सरदार पटेल ने हिंदुस्तान को सोमनाथ के रूप में सांस्कृतिक चेतना में जो मंदिर दिया है, उसके लिए न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरा देश गौरव अनुभव करता है। आज हम संकल्प करें कि सोमनाथ के मंदिर का पुनर्निर्माण होना ही चाहिए। यह हमारा परम कर्तव्य है। सोमनाथ को शिक्षा, संस्कृति और धर्म के केंद्र के रूप में विकसित करना मेरा संकल्प है।

--आईएएनएस

एसएके/एबीएम