सोमनाथ मंदिर की तरह भारत भी हर चुनौती के बाद और अधिक मजबूत होकर उभरा है: पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। सोमनाथ अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के एक लेख का जिक्र करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय आत्मविश्वास की शुरुआती और सबसे बड़ी अभिव्यक्तियों में से एक था।
पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि तमाम राजनीतिक विरोध के बावजूद मंदिर का पुनर्निर्माण और उद्घाटन हुआ, जिसने भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय गौरव की नींव रखी।
पीयूष गोयल ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की वर्षगांठ कुछ ही दिनों के अंतर पर आती हैं और दोनों घटनाएं भारत की मजबूती, धैर्य और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे सोमनाथ मंदिर हर हमले के बाद फिर से अपनी भव्यता के साथ खड़ा हुआ, उसी तरह भारत भी हर चुनौती के बाद और अधिक मजबूत बनकर उभरा है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जो आधुनिकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम पेश करता है।
अपने लेख में पीयूष गोयल ने कहा कि 75 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा भारत की सभ्यतागत शक्ति और सांस्कृतिक गौरव के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक क्षण था। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन की मूल भावना को भी मजबूत करती है।
उन्होंने लेख में लिखा कि गुजरात के समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा निशाना बनाया गया, लेकिन हर बार यह और अधिक भव्य रूप में पुनः खड़ा हुआ। यह भारत के इतिहास जैसा ही है, जहां देश ने अपनी संस्कृति, आस्था और विरासत पर हुए हमलों के बावजूद हमेशा वापसी की।
लेख में पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिस तरह सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने के लिए बार-बार साजिशें रची गईं, उसी तरह सदियों तक भारत को मिटाने की कोशिश की गई, लेकिन न तो सोमनाथ खत्म हुआ और न ही भारत।
पीएम मोदी ने कहा था कि सोमनाथ पर हमलों का उद्देश्य केवल लूटपाट नहीं था, बल्कि भारत की आस्था और सांस्कृतिक पहचान को खत्म करना भी था।
पीयूष गोयल ने अपने लेख में बताया कि आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का नेतृत्व किया। यह स्वतंत्र भारत के आत्मविश्वास का शुरुआती प्रतीक बना। हालांकि उस समय भी इस फैसले का विरोध हुआ था।
उन्होंने लिखा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल होने का विरोध किया था, लेकिन इसके बावजूद 11 मई 1951 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का उद्घाटन किया।
पीयूष गोयल ने कहा कि आज का भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत रखते हुए आधुनिक विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की यही ताकत उसे वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देती है और देश आने वाले समय में विकसित भारत के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ेगा।
--आईएएनएस
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