स्मार्ट ड्रेसिंग, घाव का दर्द घटाएगी एवं तेजी से घाव भरने में सक्षम
नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक स्मार्ट घाव ड्रेसिंग विकसित की है। यह एक ऐसी स्मार्ट ड्रेसिंग है जो घाव से होने वाले संक्रमण को रोकती है। यही नहीं, इस ड्रेसिंग को बदलते समय दर्द कम होता है, और यह घाव को तेजी से भरने में भी सहायक है। यह तकनीक एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने विकसित की है।
इस नैनोफाइबर परत में हल्दी (करक्यूमिन) भरा गया है, जो अपने प्राकृतिक रोगाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है। यह परत घाव और गॉज के बीच रखी जाती है, जिससे ड्रेसिंग का घाव से सीधा संपर्क कम होता है और ड्रेसिंग हटाते समय ऊतकों को होने वाले नुकसान का जोखिम घट जाता है। करक्यूमिन युक्त यह नैनोफाइबर धीरे-धीरे औषधि को घाव तक पहुंचाता है, जिससे लंबे समय तक नियंत्रित रूप से दवा की आपूर्ति बनी रहती है। यह तकनीक घाव के आसपास स्वच्छ और संक्रमण-रोधी वातावरण बनाए रखने में मदद करती है तथा बार-बार ड्रेसिंग बदलने और अतिरिक्त दवाओं की आवश्यकता को कम करती है।
दरअसल, जिन मरीजों की चोटों में बार-बार ड्रेसिंग बदलने की आवश्यकता होती है, उन्हें हर बार ड्रेसिंग के समय दर्द और असुविधा का सामना करना पड़ता है। एनआईटी राउरकेला के जैव प्रौद्योगिकी एवं चिकित्सा अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर प्रो. प्रसून कुमार द्वारा विकसित यह नवीन ड्रेसिंग इसी महत्वपूर्ण समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है। किफायती होने, तरल पदार्थ को अच्छी तरह सुखाने तथा उपयोग में आसान होने के कारण कॉटन गॉज बैंडेज घाव की ड्रेसिंग के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग रक्त, घाव से निकलने वाले तरल (एक्स्यूडेट) तथा मरहम को लगाने करने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
हालांकि, पारंपरिक कॉटन गॉज ड्रेसिंग संक्रमण को रोकने या मरीज की असुविधा को कम करने में सक्षम नहीं होती। इसके अलावा, यह घाव की सतह से चिपक जाती है जिससे ड्रेसिंग बदलते समय नई बनी ऊतक (टिश्यू) को नुकसान पहुंचता है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। इन सीमाओं को दूर करने के लिए एनआईटी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने चिटोसन-लेपित कॉटन गॉज और इलेक्ट्रोस्पन नैनोफाइबर परत को एकीकृत कर एक स्मार्ट कॉटन गॉज ड्रेसिंग विकसित की है।
विकसित स्मार्ट ड्रेसिंग के बारे में बताते हुए प्रो. प्रसून कुमार ने कहा, "प्रयोगशाला परीक्षणों में हमने पाया कि विकसित ड्रेसिंग, सामान्य कॉटन गॉज ड्रेसिंग की तुलना में घाव से कम चिपकती है। नैनोफाइबर परत से करक्यूमिन का नियंत्रित और निरंतर उत्सर्जन जीवाणुरोधी सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि यह परत कोशिकाओं की वृद्धि और ऊतकों के पुनर्निर्माण (टिश्यू रीजनरेशन) को भी समर्थन देती है।"
विकसित स्मार्ट ड्रेसिंग की प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो बार-बार ड्रेसिंग बदलने के दौरान इसमें कम दर्द होता है। यह नई बनी ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाती है। कोशिकाओं की वृद्धि और ऊतकों के पुनर्निर्माण में नैनोफाइबर परत काफी सहायक होती है। करक्यूमिन के नियंत्रित एवं निरंतर उत्सर्जन के माध्यम से जीवाणुरोधी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह घाव के आसपास स्वच्छ एवं संक्रमण-प्रतिरोधी वातावरण बनाए रखती है। इस स्मार्ट ड्रेसिंग की लागत के बारे में प्रो. कुमार ने बताया कि 10 सेंटीमीटर चौड़ी व 4 मीटर आकार के सामान्य कॉटन गॉज बैंडेज रोल की कीमत लगभग 30 रुपए होती है। वहीं इसी आकार की उन्नत स्मार्ट ड्रेसिंग का व्यावसायिक स्तर पर निर्माण होने पर इसकी अनुमानित लागत लगभग 50-60 रुपए होगी। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका इमर्जेंट मैटेरियल्स में प्रकाशित हुए हैं।
शोध पत्र के सह-लेखकों में एनआईटी राउरकेला के जैव प्रौद्योगिकी एवं चिकित्सा अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. प्रसून कुमार, प्रो. देवेंद्र वर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर), प्रो. ईरु बनोथ (सहायक प्रोफेसर) तथा शोधार्थी स्वागातिका बारिक, रिका रानी प्रधान, शिखा त्रिपाठी और समद्रिता रॉय शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध उन्नत चिकित्सा उपचारों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगले चरण में शोध दल इस विकसित तकनीक के लिए पेटेंट आवेदन दाखिल करने तथा क्लीनिकल परीक्षणों के लिए उद्योग जगत के साथ संभावित सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने की योजना बना रहा है।
--आईएएनएस
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