नासिक-त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ महाकुंभ की शुरुआत, राष्ट्रपति ने किया ध्वजारोहण: वीडियो में जाने 20 महीने तक चलेगा मेला, 12 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ महाकुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत हो गई है। शनिवार को दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति ने नासिक के रामकुंड में ध्वजारोहण और स्तंभ पूजन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को राष्ट्रपति संबोधित भी करेंगी। यह महाकुंभ हर 12 साल में आयोजित होता है और इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस बार करीब 20 महीने तक चलने वाले महाकुंभ में नासिक में 8 से 10 करोड़ और त्र्यंबकेश्वर में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। श्रद्धालु गोदावरी नदी में पवित्र स्नान करेंगे। नासिक में रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ स्नान के प्रमुख केंद्र होंगे।
रामकुंड में ध्वजारोहण और स्तंभ पूजन
महाकुंभ के शुभारंभ के अवसर पर नासिक के रामकुंड में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रपति ने ध्वजारोहण और स्तंभ पूजन कर सिंहस्थ महाकुंभ की औपचारिक शुरुआत की। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस अवसर पर वे कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगी।इससे पहले शुक्रवार को नासिक में महाध्वज ग्राम परिक्रमा निकाली गई थी। महाकुंभ के आयोजन को लेकर दोनों धार्मिक शहरों में तैयारियां की गई हैं। इस दौरान शंखनाद के आयोजन में बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाणपत्र भी सौंपा जाएगा।
20 महीने तक चलेगा महाकुंभ, स्नान के 97 मुहूर्त
सिंहस्थ महाकुंभ करीब 20 महीने तक चलेगा। इस दौरान नासिक में स्नान के 44 मुहूर्त और त्र्यंबकेश्वर में 53 मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।महाकुंभ के दौरान गोदावरी नदी के अलग-अलग घाटों पर धार्मिक स्नान और पूजा-अर्चना होगी। नासिक का रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर का कुशावर्त तीर्थ इस आयोजन के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान अलग-अलग स्थानों पर
नासिक सिंहस्थ महाकुंभ की एक खास विशेषता यह है कि यहां वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान अलग-अलग तीर्थस्थलों पर होते हैं। नासिक और त्र्यंबकेश्वर को एक ही महाकुंभ आयोजन के दो प्रमुख केंद्र माना जाता है।नासिक में रामकुंड के आसपास वैष्णव परंपरा से जुड़े धार्मिक आयोजन होते हैं, जबकि त्र्यंबकेश्वर में शैव परंपरा के अखाड़ों और साधु-संतों की गतिविधियां प्रमुख रहती हैं। इस व्यवस्था के कारण दोनों स्थानों का धार्मिक महत्व अलग-अलग है।
करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
सरकार को उम्मीद है कि महाकुंभ के दौरान नासिक और त्र्यंबकेश्वर में कुल मिलाकर 12 से 14 करोड़ श्रद्धालु पहुंच सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने को देखते हुए परिवहन, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और ठहरने जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।सिंहस्थ महाकुंभ धार्मिक आस्था के साथ महाराष्ट्र के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी बड़ा आयोजन है। आने वाले महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं, साधु-संतों और अखाड़ों का आगमन जारी रहने की उम्मीद है।