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सिमडेगा के आम पहुंचे लंदन, महिलाओं के नेतृत्व में जिले को मिली बड़ी उपलब्धि : उपायुक्त कंचन सिंह

 

सिमडेगा, 8 जून (आईएएनएस)। झारखंड के सिमडेगा जिले ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिले के आम पहली बार लंदन पहुंच गए हैं। इस उपलब्धि पर जिले के नेतृत्व ने इसे जिले और किसानों के लिए बड़ी सफलता बताया है। इसके साथ ही किसानों में खुशी की लहर है।

जिला उपायुक्त कंचन सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "सिमडेगा के आम लंदन तक पहुंचना जिले के लिए गौरव की बात है। जिले में मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा संचालित बागवानी परियोजनाओं के तहत राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 3,101 एकड़ क्षेत्र में आम का रोपण किया गया था। वर्तमान में ये बागवान शूटिंग स्टेज पर पहुंच चुके हैं और लगभग 300 मीट्रिक टन आम उत्पादन की उम्मीद है। बाजार की तलाश में जिला प्रशासन ने विभिन्न राज्यों के खरीदारों को आमंत्रित किया। इसी कड़ी में सफल प्रयासों के बाद 1.3 टन उच्च गुणवत्ता वाले आम लंदन निर्यात किए गए।"

उन्होंने कहा कि यह जिले के लिए पहला निर्यात है। आगे और खेप भेजने की तैयारी चल रही है। इस बार लक्ष्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सिमडेगा आम को स्थापित करना है, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके और उनकी आय में वृद्धि हो। यह न केवल जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि किसानों के मनोबल को बढ़ाने वाला कार्य भी है। इससे अन्य उत्पादों जैसे काजू, चिरौंजी आदि को भी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त होगा।”

उपायुक्त ने कहा कि विशेष रूप से इस परियोजना में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। मनरेगा और अन्य योजनाओं के तहत महिलाओं ने बागवानी का काम किया। किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) भी पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित है। तकनीकी सहयोग और देखभाल के कारण पौधे स्वस्थ रहे और अच्छी पैदावार की संभावना बनी।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की महिला केंद्रित विकास नीति को ध्यान में रखते हुए यह काम किया जा रहा है। इसके साथ ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सामाजिक परिवर्तन का आधार है। इससे महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक सम्मान मिलेगा। इस सफल निर्यात से स्थानीय किसानों, खासकर महिलाओं के चेहरे पर खुशी है। प्रशासन का प्रयास है कि भविष्य में जिले के अन्य कृषि उत्पाद भी वैश्विक बाजार तक पहुंचे। यह उपलब्धि महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूत करती है।

--आईएएनएस

एसएके/एबीएम