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1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे राजीव बब्बर, राहुल गांधी की रैली पर उठाए सवाल

 

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की याद में शनिवार को दिल्ली के पश्चिमी इलाके तिलक नगर स्थित शहीद गुरुद्वारा में विशेष पाठ का आयोजन किया गया। इस मौके पर भाजपा के नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों के सह-संयोजक राजीव बब्बर भी गुरुद्वारा पहुंचे और दंगों में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने 1984 की घटनाओं को नरसंहार बताते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा।

भाजपा के नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों के सह-संयोजक राजीव बब्बर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगे देश के इतिहास का काला अध्याय हैं। उस दौरान बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की हत्या की गई थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वाजपेयी जी वर्ष 1984 में तिलक नगर के 19 ब्लॉक पहुंचे थे। उस समय उन्होंने कहा था कि यह दंगा नहीं, बल्कि नरसंहार था। बब्बर के मुताबिक, दंगा दो पक्षों के बीच होता है, जबकि 1984 में एकतरफा कत्लेआम हुआ था।

उन्होंने कहा कि आज का दिन उन परिवारों के लिए बेहद भावुक और दुखद है, जिन्होंने अपने परिजनों को खोया था। इस अवसर पर सभी को प्रार्थना करनी चाहिए कि देश में दोबारा कभी ऐसी घटना न हो। उन्होंने कहा कि हमें उन लोगों को याद करने के साथ-साथ समाज में सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प भी लेना चाहिए।

राहुल गांधी की रैली पर सवाल उठाते हुए राजीव बब्बर ने कहा कि एक नवंबर का दिन 1984 के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने और उन्हें याद करने का दिन है। ऐसे में इस दिन राजनीतिक आंदोलन या रैली आयोजित करना उचित नहीं है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। बब्बर ने इस बयान को 1984 की घटनाओं के संदर्भ में उठाते हुए कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की।

राजीव बब्बर ने बताया कि 1984 के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी ओर से मुंह पर काली पट्टी बांधकर मौन रैली निकाली जा रही है। यह रैली हरि नगर से शुरू होकर तिलक नगर तक जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस मौन रैली का उद्देश्य किसी राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है बल्कि देश में शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देना है। साथ ही यह संकल्प लेना है कि भविष्य में देश में ऐसी हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम