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सीकर का मीठा प्याज देशभर में बना पहचान, खेती में नवाचार से किसानों ने रचा नया इतिहास

 

खेती में अपने नवाचारों के जरिए अलग पहचान बनाने वाला राजस्थान का सीकर जिला अब मीठे प्याज के उत्पादन से देशभर में अपनी धाक जमा रहा है। खासतौर पर धोद क्षेत्र में उगाया जाने वाला प्याज अपनी अनोखी मिठास, बेहतरीन गुणवत्ता और लंबी शेल्फ लाइफ के कारण न केवल राजस्थान बल्कि देश की प्रमुख मंडियों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

शेखावाटी अंचल का सीकर जिला पहले से ही आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए जाना जाता रहा है। यहां के किसानों ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए नई किस्मों के बीज, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, जैविक खाद और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया है। इन्हीं प्रयोगों का परिणाम है कि धोद क्षेत्र का प्याज स्वाद और गुणवत्ता में अलग पहचान बना चुका है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि यहां की मिट्टी और जलवायु प्याज की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। दिन में तेज धूप और रात में हल्की ठंडक प्याज की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। साथ ही, संतुलित सिंचाई और उर्वरकों के सही उपयोग से उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां प्रति बीघा उत्पादन सीमित था, वहीं अब आधुनिक तकनीकों के चलते पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

व्यापारियों के अनुसार सीकर का मीठा प्याज स्वाद में हल्का और कम तीखापन लिए होता है, जिससे इसकी मांग होटल, रेस्टोरेंट और घरेलू बाजार में अधिक रहती है। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और जयपुर जैसी बड़ी मंडियों में भी इसकी सप्लाई की जा रही है। कई राज्यों के व्यापारी सीधे किसानों से संपर्क कर खरीदारी कर रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह वैज्ञानिक पद्धति और गुणवत्ता नियंत्रण पर ध्यान दिया जाता रहा तो सीकर का प्याज राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांड के रूप में स्थापित हो सकता है। राज्य सरकार और कृषि विभाग भी किसानों को नई तकनीकों, उन्नत बीज और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

इस बढ़ती मांग का सकारात्मक असर किसानों की आय पर भी देखने को मिल रहा है। जहां पहले किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, वहीं अब प्याज की खेती उन्हें आर्थिक मजबूती दे रही है। कई युवा किसान भी खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने लगे हैं।

सीकर का मीठा प्याज आज गुणवत्ता, स्वाद और नवाचार का प्रतीक बन चुका है। यदि इसी तरह उत्पादन और विपणन की रणनीति मजबूत होती रही तो आने वाले समय में यह क्षेत्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक इलाकों में अग्रणी स्थान हासिल कर सकता है।