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TMC में बड़ी हलचल के संकेत: 20 सांसदों के NDA के समर्थन की खबर, वीडियो में देंखे भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद सियासी अटकलें तेज

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ी हलचल देखने को मिली जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 सांसदों के सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के समर्थन में जाने की खबर सामने आई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब राज्य की राजनीति पहले से ही तीखी खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है।

सूत्रों और सामने आई जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर इन सांसदों की एक अहम बैठक केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई। इस बैठक में TMC के राज्यसभा सांसद पद से हाल ही में इस्तीफा दे चुके सुखेंदु शेखर रे भी मौजूद थे, जिससे इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक वजन मिल गया है।

20 सांसदों की बैठक, NDA समर्थन की चर्चा का दावा

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बैठक में जिन नेताओं के शामिल होने की बात सामने आई है, उनमें काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि बाकी सांसदों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।पूर्व TMC नेता काकोली घोष ने दावा किया कि पार्टी के कुल 20 सांसदों ने NDA को समर्थन देने का निर्णय लिया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को औपचारिक पत्र भी भेज दिया गया है।यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद में TMC की स्थिति के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा।

ममता बनर्जी खेमे में चिंता की लहर

इन घटनाओं के बीच TMC नेतृत्व और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खेमे में भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह TMC के भीतर बढ़ती असंतोष की ओर इशारा कर सकता है।सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में पार्टी के भीतर संगठनात्मक फैसलों और रणनीति को लेकर असंतोष की खबरें भी सामने आती रही हैं, जिससे कुछ नेताओं के पाला बदलने की अटकलों को और बल मिला है।

शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी गर्मी

इसी बीच बंगाल भाजपा नेता और विपक्ष के प्रमुख चेहरे शुभेंदु अधिकारी की उपस्थिति ने भी राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। बैठक के दौरान या उसके बाद उनकी मौजूदगी को लेकर तरह-तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।राजनीतिक हलकों में इसे बंगाल की सत्ता राजनीति में संभावित बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक माहौल गरम, लेकिन पुष्टि का इंतजार

फिलहाल पूरे मामले में कई दावे और राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर किसी बड़े दल-बदल या समर्थन परिवर्तन की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में यह मामला अभी भी राजनीतिक अटकलों के दायरे में बना हुआ है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर सांसद किसी नए राजनीतिक रुख की ओर बढ़ते हैं, तो इसका असर न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

आगे क्या?

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि TMC नेतृत्व इस कथित घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या वास्तव में सांसदों के पाले बदलने की खबरें औपचारिक रूप लेती हैं या यह केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।