हैरान कर देने वाला वीडियो! बंदरिया ने छोटे बच्चे को घंटों तक बनाए रखा बंधक, वजह जान रह जाएंगे दंग
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के चरथावल कस्बे से एक घटना सामने आई है—एक ऐसी कहानी जो इतनी चौंकाने वाली है कि किसी को भी सिहरा दे, और साथ ही उसका दिल भी पिघला दे। यहाँ, एक मादा बंदर लगभग दो घंटे तक बैठी रही, और अपनी गोद में एक मासूम तीन महीने की बच्ची को थामे रही। इस पूरी घटना के दौरान, बच्ची की माँ का रो-रोकर बुरा हाल था, वह लगातार बिलख रही थी, लेकिन बंदर टस से मस नहीं हुई और बच्ची को छोड़ने को बिल्कुल तैयार नहीं थी।
यह खौफनाक घटना शुरू कैसे हुई?
चरथावल के रहने वाले तहसीन सुबह दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम पर चले गए थे। उनकी पत्नी, गुलिस्तान, घर पर अकेली थीं। अपनी तीन महीने की बेटी को दूध पिलाने के बाद, उन्होंने बच्ची को एक कमरे में सुला दिया और घर के काम-काज निपटाने के लिए बाहर चली गईं। इसी बीच, एक मादा बंदर चुपके से कमरे में घुस आई और सोती हुई बच्ची के ठीक बगल में बैठ गई। जब गुलिस्तान कमरे में वापस लौटीं, तो वह पूरी तरह से सन्न रह गईं—उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उन्होंने देखा कि एक बंदर उनकी मासूम बच्ची को बड़े प्यार से सहला रही थी और उसके गालों को दुलार रही थी।
एक बचावकर्ता की सूझबूझ ने बचाई जान
जब बाकी सभी तरीके नाकाम हो गए, और सारे विकल्प खत्म हो गए, तो जानवरों को बचाने वाले (एनिमल रेस्क्यूअर) सन्नी चोपड़ा को मौके पर बुलाया गया। सन्नी ने तुरंत हालात का जायज़ा लिया और बंदर का ध्यान भटकाने के लिए एक अनोखी तरकीब सोची। उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर जंगली जानवरों के वीडियो चलाने शुरू कर दिए। वीडियो की आवाज़ों और दृश्यों में खोकर, बंदर का ध्यान बच्ची से हट गया। जैसे ही बंदर वीडियो देखने के लिए सन्नी की तरफ बढ़ा, बचाव दल ने इस मौके का फ़ायदा उठाकर बच्ची को सुरक्षित बचा लिया और उसे उसकी माँ की गोद में वापस सौंप दिया।
**ऐसा क्यों हुआ?** बंदर के इस व्यवहार के पीछे की सच्चाई
बचाव दल के सदस्य सन्नी चोपड़ा ने बताया कि असल में वह मादा बंदर एक माँ थी, जिसके अपने बच्चे की मौत अभी छह दिन पहले ही हुई थी। अपने बच्चे को खोने के दुख से वह इतनी टूट गई थी कि लगभग पागल सी हो गई थी। जब उसने इस तीन महीने की बच्ची को देखा, तो उसे लगा कि यह बच्ची उसी का खोया हुआ बच्चा है। इसी वजह से, जब लोगों ने बच्ची को उससे छीनने की कोशिश की, तो उसने एक ज़बरदस्त रक्षक की तरह बर्ताव किया और आक्रामक हो गई।
सावधानी बहुत ज़रूरी है
यह घटना हमें याद दिलाती है कि बेज़ुबान जानवरों में भी इंसानों की तरह ही गहरी भावनाएँ होती हैं। हालाँकि बच्ची अब सुरक्षित है, लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, वहाँ दरवाज़े और खिड़कियाँ बंद रखना—या फिर सुरक्षा के लिए जाली लगवाना—बहुत ज़रूरी है; खासकर उन इलाकों में जहाँ बंदरों से काफ़ी ख़तरा रहता है।