भारत से संघर्ष के बाद पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की बढ़ी मांग का दावा, फुटेज में जानें शहबाज शरीफ बोले— कई देश कर रहे हैं बातचीत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि भारत के साथ पिछले साल मई में हुए सैन्य संघर्ष के बाद पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की अंतरराष्ट्रीय मांग में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की वायुसेना के प्रदर्शन के बाद कई देश पाकिस्तानी फाइटर जेट्स खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं और इसको लेकर बातचीत भी चल रही है।
रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रक्षा उत्पादन क्षमता और स्वदेशी तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है। हालांकि, शहबाज शरीफ ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि किन-किन लड़ाकू विमानों की मांग बढ़ी है और किन देशों के साथ औपचारिक समझौते की प्रक्रिया चल रही है।
हालांकि, पाकिस्तानी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के स्वदेशी रूप से विकसित JF-17 थंडर फाइटर जेट को लेकर सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश, सूडान, लीबिया, सऊदी अरब, इराक और इंडोनेशिया जैसे देश JF-17 थंडर फाइटर जेट्स खरीदने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं।
JF-17 थंडर फाइटर जेट को पाकिस्तान और चीन के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है। यह एक हल्का, मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे हवा से हवा में और हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम माना जाता है। पाकिस्तान लंबे समय से इस फाइटर जेट को अपनी वायुसेना की रीढ़ के तौर पर पेश करता रहा है और इसे अपेक्षाकृत कम लागत वाला विकल्प बताता है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि रक्षा निर्यात बढ़ने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे देश के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि इससे न केवल विदेशी मुद्रा आएगी, बल्कि रक्षा उद्योग में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उनके अनुसार, पाकिस्तान अब सिर्फ आयात पर निर्भर रहने वाला देश नहीं, बल्कि रक्षा उपकरणों के निर्यातक के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दावों को लेकर अभी सतर्क रहने की जरूरत है। कई बार देशों के बीच बातचीत और रुचि दिखाने को वास्तविक सौदे से जोड़कर पेश किया जाता है, जबकि अंतिम समझौते तक पहुंचने में लंबा समय लगता है। इसके अलावा, JF-17 की तकनीकी क्षमताओं, रखरखाव और युद्धक प्रदर्शन को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग राय सामने आती रही है।
भारत के साथ पिछले साल मई में हुए संघर्ष को लेकर भी दोनों देशों के दावे अलग-अलग रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तानी नेतृत्व के इस बयान को राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान के इन दावों के बाद वास्तव में कितने देशों के साथ ठोस रक्षा सौदे होते हैं और क्या JF-17 थंडर अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में अपनी जगह बना पाता है।