शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन संवैधानिक हक, लेकिन देशविरोधी नारे कबूल नहीं: मौलाना शहाबुद्दीन
बरेली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। मौलाना शहाबुद्दीन ने कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र पहले भी भारत का हिस्सा था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। उन्होंने कश्मीर में विकास कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा करते हुए कहा कि वहां की जनता अमन और शांति के साथ भारत में रहना पसंद करती है। वहीं, जामिया मिलिया इस्लामिया में हो रहे विरोध-प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसकी आड़ में हिंसा, तोड़फोड़ और देशविरोधी नारेबाजी स्वीकार नहीं की जा सकती।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपनी समस्याएं, जरूरतें और दुख-दर्द सरकार तक पहुंचाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अधिकार का इस्तेमाल अराजकता फैलाने या देश के खिलाफ नारे लगाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हाल के दिनों में हुए कुछ प्रदर्शनों के दौरान हिंसक घटनाएं सामने आईं। किसी को भी हिंसा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने तोड़फोड़, आगजनी और सत्ता पलटने की बातें करने के साथ बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका का उदाहरण देने पर भी आपत्ति जताई।
मौलाना ने कहा कि ऐसी गतिविधियां देश की एकता और शांति के लिए उचित नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि हिंसा और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जामिया मिलिया इस्लामिया में कई दिनों से जारी धरने और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर हो रही नारेबाजी का उल्लेख करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन ने छात्रों और आम लोगों से स्थिति को समझने की अपील की। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। जम्मू-कश्मीर की जनता अमन पसंद है और भारत के साथ प्रेम और सौहार्द से रहना चाहती है।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर में विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने रेल पटरियां बिछाने, पुल बनाने और सड़कों के निर्माण जैसे कार्यों का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि आतंकवादी गतिविधियों पर बड़े पैमाने पर नियंत्रण किया गया है। उन्होंने पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर का जिक्र करते हुए भी दावा किया कि वहां के लोग भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा करते समय शांति, विकास और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
--आईएएनएस
पीएसके