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सरकारी डेंटल हॉस्पिटल में स्टाफ की भारी कमी, वीडियो में जाने बत्तीसी के लिए महीनों इंतजार, RCT मरीजों को कैप के लिए सालभर की वेटिंग

 

प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज से संबद्ध डेंटल हॉस्पिटल में डेंटल मैकेनिकों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। कृत्रिम दांत (डेंचर), रिमूवेबल पार्शियल डेंचर (RPD) और रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT) के बाद लगने वाली कैप जैसी जरूरी सेवाओं के लिए मरीजों को महीनों, बल्कि कई मामलों में एक साल तक इंतजार करना पड़ रहा है। स्टाफ की कमी के चलते इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

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बत्तीसी बनवाने के लिए लंबा इंतजार

अस्पताल में कृत्रिम दांतों का पूरा सेट यानी बत्तीसी (डेंचर) बनवाने वाले मरीजों को छह महीने से लेकर एक साल तक इंतजार करना पड़ रहा है। बुजुर्ग मरीजों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक परेशानी का कारण बन रही है, क्योंकि लंबे समय तक दांत न होने से भोजन चबाने और सामान्य जीवन जीने में कठिनाई होती है।

RPD और कैप के लिए भी लंबी वेटिंग

सिर्फ डेंचर ही नहीं, बल्कि दुर्घटना या अन्य कारणों से टूटे या खराब हुए दांतों की जगह रिमूवेबल पार्शियल डेंचर (RPD) लगवाने वाले मरीजों को भी बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।वहीं, रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT) कराने वाले मरीजों को दांत पर कैप लगवाने के लिए भी करीब एक वर्ष तक इंतजार करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि RCT के बाद समय पर कैप नहीं लगने से उपचार की सफलता प्रभावित हो सकती है और दांत को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

स्टाफ की कमी बनी बड़ी वजह

अस्पताल में डेंटल मैकेनिकों की कमी के कारण लैब का काम निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। सीमित कर्मचारियों पर बढ़ते मरीजों का दबाव होने से कृत्रिम दांत और अन्य डेंटल उपकरण तैयार करने में लगातार देरी हो रही है।इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है और अस्पताल की सेवाओं की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

मजबूरी में निजी क्लीनिक का रुख

सरकारी अस्पताल में लंबी प्रतीक्षा सूची के कारण कई मरीज मजबूर होकर निजी डेंटल क्लीनिकों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च अधिक होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

जोधपुर में कॉलेज, लेकिन लैब अभी नहीं

राज्य सरकार ने जोधपुर में नया सरकारी डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल शुरू किया है, लेकिन वहां अभी तक डेंचर और अन्य प्रोस्थोडॉन्टिक सेवाओं के लिए आवश्यक डेंटल लैब पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी है। ऐसे में प्रदेश के अधिकांश मरीज अब भी जयपुर स्थित सरकारी डेंटल हॉस्पिटल पर ही निर्भर हैं।

विशेषज्ञों ने बढ़ाई स्टाफ भर्ती की मांग

डेंटल विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए डेंटल मैकेनिकों और तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पदों को जल्द भरना आवश्यक है। साथ ही आधुनिक डेंटल लैब का विस्तार और अन्य सरकारी डेंटल संस्थानों में भी ऐसी सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और लंबी वेटिंग से राहत मिले।