सेना प्रमुख ने किया स्वदेशी विकसित रक्षा उपकरणों और तकनीकों का निरीक्षण
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने स्वदेशी तौर पर विकसित की गई रक्षा तकनीकों और नवाचारों को देखा। मंगलवार को वह सेना द्वारा आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम में मौजूद रहे। यह एक रक्षा त्रिवेणी संगम है जहां तकनीक, उद्योग और सैन्य शक्ति का संगम हो रहा है।
सिम्पोजियम में प्रदर्शित तकनीकों में आधुनिक युद्ध प्रणालियां, निगरानी उपकरण, संचार प्रणालियां और उन्नत रक्षा समाधान शामिल हैं। ये वे डिफेंस टेक्नोलॉजी हैं जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी। यहां सिम्पोजियम में थल सेनाध्यक्ष को विभिन्न उद्योग साझेदारों द्वारा विकसित स्वदेशी रक्षा तकनीकों और नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी गई।
उन्होंने भारतीय सेना और स्वदेशी रक्षा उद्योग के बीच हो रहे समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोजन सशस्त्र बलों, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य न केवल ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाना है, बल्कि रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाना और देश के आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम को आगे बढ़ाना भी है। नॉर्थ टेक सिम्पोजियम में भारतीय रक्षा क्षेत्र में नवाचार, साझेदारी और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है, जो भविष्य में भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
इस सिम्पोजियम में तकनीक, उद्योग और सैनिक एक साथ एक मंच पर मिल रहे हैं। इसका उद्देश्य देश में विकसित हो रही आधुनिक और स्वदेशी तकनीकों को एक मंच पर लाना और उन्हें सेना की जरूरतों के अनुसार उपयोग योग्य बनाना है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 4 मई को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इस तीन दिवसीय ‘नॉर्थ टेक सिम्पोजियम’ का उद्घाटन किया है। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सेना के उत्तरी कमान और मध्य कमान द्वारा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के साथ मिलकर किया जा रहा है। यह सिम्पोजियम 4 मई से शुरू हुआ है और 6 मई तक चलेगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यक्रम में देशभर से कई छोटे, मध्यम और बड़े उद्योग शामिल हुए हैं। इसके अलावा, निजी रक्षा कंपनियां, स्टार्ट-अप और सेना से जुड़े नवोन्मेषक भी यहां अपनी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां कुल 284 कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाकर नई-नई रक्षा तकनीकों और उत्पादों को प्रदर्शित किया है।
दरअसल सिम्पोजियम का मकसद ऐसी तकनीकों की पहचान करना है, जिन्हें सीधे सेना से जुड़े क्षेत्रों में उपयोग किया जा सके। साथ ही उपकरणों के रखरखाव (मेंटेनेंस) को बेहतर बनाने और खरीद प्रक्रिया को सरल करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे भारतीय सेना को आधुनिक बनाने और देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
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