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सावन के सोमवार का व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा पूरा फल

 

नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। खासतौर पर सावन के सोमवार का धार्मिक महत्व बहुत अधिक होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

इस साल सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। ऐसे में अगर आप पहली बार सावन सोमवार का व्रत रखने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी नियमों को जानना बेहद जरूरी है। व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है बल्कि यह मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी प्रतीक है।

सावन के सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद मन को शांत करके भगवान शिव का ध्यान करें। पूजा स्थल की सफाई करने के बाद शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और पूजा सामग्री चढ़ाएं। हालांकि, ध्यान रखें कि शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते और केतकी के फूल नहीं चढ़ाए जाते हैं।

सावन के दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। कुछ परिवारों में सावन के दौरान दही, कढ़ी, बैंगन और कुछ हरी सब्जियों का सेवन भी नहीं किया जाता। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने परिवार की मान्यताओं का पालन करना बेहतर माना जाता है।

सोमवार के व्रत में सुबह फल, दूध या भुना हुआ मखाना लिया जा सकता है। दोपहर में साबूदाना खिचड़ी, आलू की सब्जी या समा के चावल का सेवन किया जा सकता है। शाम के समय नारियल पानी, सूखे मेवे या फलों की चाट का सेवन किया जा सकता है।

कुछ लोग रात को भोजन कर लेते हैं। ऐसे में व्रत समाप्त करने से पहले शाम की पूजा और आरती जरूर करनी चाहिए। इसके बाद ही व्रत का पारण करें। पारण हमेशा हल्के और सात्विक भोजन से करना चाहिए।

व्रत के दौरान ज्यादा से ज्यादा समय भगवान शिव की भक्ति, ध्यान और मंत्र जाप में लगाना चाहिए। रुद्राक्ष की माला से 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन क्रोध करने, झूठ बोलने, किसी की बुराई करने और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम