सत्य निकेतन हादसे पर हरीश रावत बोले, बरसात से पहले जर्जर इमारतों को खाली कराया जाना चाहिए
नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पुरानी और जर्जर इमारतों की पहचान कर उन्हें समय रहते असुरक्षित घोषित किया जाना चाहिए था, ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि हर इमारत की पहचान की जानी चाहिए। मानसून से पहले ही ऐसी इमारतों को असुरक्षित घोषित कर दिया जाना चाहिए था और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया जाना चाहिए था। जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, तब इलाके की व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए गए थे। अंदर की गलियों को चौड़ा किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के सत्ता से जाने के बाद इन वर्षों में क्षेत्र में पर्याप्त काम नहीं हुआ। पुरानी इमारतों की भी एक निर्धारित उम्र होती है और समय के साथ उनकी स्थिति की जांच किया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के वक्त भाजपा बड़े-बड़े दावा करती है। 2014 का वादा पूरा नहीं हुआ तो रेखा गुप्ता से क्या उम्मीद करेंगे। हरीश रावत ने तंज कसते हुए कहा कि लोग तो अभी अपने खाते में 15 लाख रुपए टटोल रहे हैं। जब 2014 का वादा पूरा नहीं हुआ तो रेखा गुप्ता से क्या सवाल करें? जब उनके शीर्ष नेतृत्व ने ही वादे के साथ वफा नहीं की तो रेखा गुप्ता से दिल्ली में कहां से वफा करेंगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटाए जाने पर हरीश रावत ने कहा कि पार्टी में जिम्मेदारियों में बदलाव सामान्य प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि पार्टी में ये चलता रहता है। एक पोस्ट से दूसरी पोस्ट और एक जगह से दूसरी जगह जिम्मेदारी दी जाती है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। भूपेश बघेल को असम का चुनौतीपूर्ण दायित्व दिया गया है।
उत्तराखंड में भाजपा के खिलाफ होने वाले विरोध-प्रदर्शन में शामिल नहीं होने पर हरीश रावत ने कहा कि वह फिलहाल शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं। इसलिए मैं वहां नहीं हूं। स्वस्थ हो जाऊंगा तो शायद जाऊंगा। दिल्ली में रहते हुए भी उत्तराखंड के लोगों से लगातार मिल रहा हूं। जिस समय आप जो काम कर सकते हैं, अपनी क्षमता के अनुसार वही काम करना चाहिए। इस समय मैं जिस स्थिति में हूं, उसमें जो कर सकता हूं, वह कर रहा हूं।
उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी में नए लोगों की ज्वाइनिंग कराने की इच्छा के बारे में पूछे जाने पर रावत ने कहा कि हर इच्छा पूरी हो, यह जरूरी नहीं है। चाहत अपनी जगह है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है।
पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ बयान पर हरीश रावत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि राजनीतिक बातचीत में व्यंग्य और मुहावरों का इस्तेमाल होता है, लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी भाषा की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। कुछ पद ऐसे होते हैं, जिन पर बैठे व्यक्ति को शब्दों का इस्तेमाल पद की गरिमा के अनुकूल करना पड़ता है। प्रधानमंत्री देश के हैं। अगर कोई आपसे असहमत है तो क्या उसे ‘दिमागी नक्सल’ कहेंगे? भाजपा के छोटे नेता ऐसा कहें तो अलग बात है, लेकिन प्रधानमंत्री को ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए।
--आईएएनएस
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