सरकार का लक्ष्य इंटरनेट को अश्लील और गैरकानूनी कॉन्टेंट से मुक्त रखना : राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन
नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। सरकार का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों और सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित, भरोसेमंद, जवाबदेह और खुला डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराना है। सरकार भारत के इंटरनेट इकोसिस्टम को गैरकानूनी, अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री से मुक्त रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल मुरुगन ने बुधवार को लोकसभा में प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों पर स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
उन्होंने बताया कि आईटी नियम, 2021 के अनुसार कोई भी मध्यस्थ अपने प्लेटफॉर्म पर अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से संबंधित, बच्चों के लिए हानिकारक, निजता का उल्लंघन करने वाली या किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री को होस्ट, प्रकाशित, प्रसारित या साझा होने की अनुमति नहीं दे सकता। नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी छूट खो सकते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
राज्य मंत्री ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को सरकार ने आईटी नियमों में संशोधन कर कृत्रिम रूप से तैयार की गई जानकारी, डीपफेक और एआई जनित सामग्री से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए नियामक व्यवस्था को और मजबूत किया। संशोधित नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों को अश्लील, भ्रामक, प्रतिरूपण करने वाली या बच्चों के लिए हानिकारक एआई जनित सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय अपनाने होंगे।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 जैसे कानूनों के तहत संबंधित अपराधों की जानकारी सक्षम अधिकारियों को देनी होगी।
डॉ. मुरुगन ने बताया कि गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के तहत शुरू किए गए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर नागरिक सभी प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों की गुमनाम शिकायत दर्ज कराने की भी सुविधा उपलब्ध है। 'महिला/बाल संबंधित अपराध की रिपोर्ट करें' मॉड्यूल के तहत शिकायतकर्ता अपनी पहचान उजागर किए बिना शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि एनसीआरपी पर ‘रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट’ नामक मॉड्यूल भी शुरू किया गया है। इसके जरिए नागरिक संदिग्ध वेबसाइट यूआरएल, व्हाट्सएप नंबर, टेलीग्राम हैंडल, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, एसएमएस हेडर, सोशल मीडिया यूआरएल और डीपफेक सामग्री की रिपोर्ट कर सकते हैं।
राज्य मंत्री के अनुसार, सरकार ने ‘महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम’ योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस सहायता से साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, साइबर सलाहकारों की नियुक्ति तथा पुलिसकर्मियों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। साथ ही 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और लोक अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच और फोरेंसिक से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया है।
डॉ. मुरुगन ने कहा कि आई4सी ने देशभर में एनसीसी, एनएसएस और नेहरू युवा केंद्र संगठन से जुड़े 2 लाख से अधिक छात्रों को साइबर स्वच्छता का प्रशिक्षण भी प्रदान किया है।
उन्होंने बताया कि छात्रों और महिलाओं में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘किशोरों/शिक्षार्थियों के लिए हैंडबुक’ और ‘महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक’ भी जारी की गई हैं।
इसके अलावा सरकार ‘सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता ’ परियोजना के माध्यम से सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करने तथा आम जनता के बीच साइबर स्वच्छता और साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी कर रही है।
--आईएएनएस
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