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सरकार और विपक्ष को बातचीत के जरिए सदन के अंदर गतिरोध खत्म करना चाहिए : आनंद दुबे

 

मुंबई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के बोलने के अधिकार का समर्थन किया। इसके साथ ही पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों से बातचीत के जरिए संसद का कामकाज सुचारू रूप से चलाने की अपील की।

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि राहुल गांधी क्‍या कहते हैं, किससे माफी नहीं मांगते, वह उनका काम है। हम यही जानते हैं कि हर आदमी को विनम्र होना चाहिए। विनम्रता ही मानव का गहना होता है। आप जितने विनम्र होंगे, उतने बड़े बनेंगे। मेरा मानना है कि माफी मांगने से कोई छोटा नहीं हो जाता, माफ करने वाला भी बहुत बड़ा हो जाता है। इस विषय को तूल नहीं देना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि आरएसएस को राजनीति में न लाते हुए भाजपा का जितना विरोध करना हो करो। सरकार की आलोचना करिए, लेकिन किसी एनजीओ और किसी तरह के संगठन को बीच में लाना गलत है।

आनंद दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के बोलने के अधिकार का समर्थन किया। उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनकर आए हैं। ऐसे लोगों को सरकार चुप नहीं करा सकती, सबको बोलने का अधिकार है।

उन्‍होंने आईएएनएस की तारीफ करते हुए कहा कि मैं सभी राष्‍ट्रीय और स्‍थानीय मीडिया का धन्‍यवाद देता हूं, जिन्‍होंने राहुल गांधी की प्रेस वार्ता को लाइव दिखाया और उनकी बात जनता तक पहुंची। आप सदन में नहीं बोलने देंगे तो हमारी मीडिया है जो लोगों को मौका देती है और खासकर आईएएनएस हर जगह जनता के मुद्दे उठाता है।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि सदन का चलना बहुत जरूरी है। 20 जुलाई से सदन शुरू हुआ और 30 जुलाई तक सदन मात्र एक दो दिन ही चल पाया है। सदन चलाने के लिए करोड़ों रुपए लगते हैं, जो हमारे टैक्‍स से आते हैं। हमें लगता है कि सरकार और विपक्ष को बैठकर बात करनी चाहिए। विपक्ष के कुछ मुद्दे हैं, जिसे सरकार को सुनना चाहिए।

पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए आनंद दुबे ने कहा कि सात साल की सजा और 10 करोड़ का जुर्माना कम है। कई करोड़ का जुर्माना और कई साल की सजा होनी चाहिए, अगर संभव हो तो फांसी की सजा मिलनी चाहिए। पेपर लीक होने के बाद भी दोषी बेधड़क घूमते हैं, पकड़े जाते हैं और जमानत पर छूट जाते हैं। पेपर लीक ही न हो इस पर कोई बात नहीं करता है। एनटीए पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम