सर्दियों में यात्रा का बना रहे हैं प्लान? प्रयागराज, वाराणसी और अयोध्या की सैर से लगेंगे चार चांद
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। धीरे-धीरे ठंड का अहसास होने लगा है। सर्दियों के मौसम में घूमने का अलग ही आनंद होता है। अगर अक्टूबर से मार्च के बीच उत्तर प्रदेश में किसी का घूमने-फिरने का मन हो तो, यहां के तीन धार्मिक नगरियों का यात्रा करना काफी आनंददायक हो सकता है। हम बात कर रहे हैं, कुंभ नगरी प्रयागराज, बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और राम नगरी अयोध्या की।
सर्दियों के मौसम में कुंभ नगरी प्रयागराज की यात्रा करने का अनुभव ही अलग होता है। इस दौरान यहां का मौसम काफी सुहावना होता है, जिससे खुले मैदानों और घाटों पर घूमना मजेदार हो जाता है। आध्यात्मिक और धार्मिक स्थलों पर जाने का मन करे तो त्रिवेणी संगम, लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर, अक्षयवट और पातालपुरी मंदिर के साथ ही मनकामेश्वर मंदिर और अलोपी देवी मंदिर में जाकर दर्शन कर पुण्य का भागी बना जा सकता है।
प्रयागराज में ऐतिहासिक और वास्तुकला से जुड़े स्थलों पर जाना हो तो आनंद भवन, स्वराज भवन और खुसरो बाग जाया जा सकता है। इसके अलावा पत्थर गिरजाघर व चंद्रशेखर आजाद पार्क, अरैल घाट और नया यमुना ब्रिज का आनंद लिया जा सकता है। सर्दियों के मौसम में अगर कोई प्रयागराज आए तो हर वर्ष लगने वाले माघ मेले में जरूर जाए। इस दौरान संगम क्षेत्र में अलग ही आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिलता है।
प्रयागराज यात्रा के दौरान सर्दियों में यहां बनी गुड़ की जलेबी का स्वाद लेना चाहिए। इसके अलावा गर्म-गरम छोले-समोसे, मसाला चुरमुरा और कुल्हड़ की चाय का स्वाद लिए बिना प्रयागराज की यात्रा अधूरी रह जाएगी। सर्दियों के मौसम में प्रयागराज के सिविल लाइंस में रुकने पर आरामदायक और आधुनिक विकल्प मिल जाते हैं। दारागंज, त्रिवेणी के नजदीक भी ठहरा जा सकता है। अगर कुंभ मेले या माघ मेले की आध्यात्मिकता में शामिल होना है तो यहां बनी अस्थायी टेंट सिटी में रुकने का शानदार अनुभव हो सकता है।
वहीं, सर्दियों के मौसम में वाराणसी की यात्रा करना भी सुहावना और बेहतरीन समय माना जाता है। इस दौरान श्रीकाशी विश्वनाथ धाम, दशाश्वमेध घाट और गंगा आरती, गंगा में सुबह का नौका-विहार, अस्सी घाट और सुबह-ए-बनारस तथा सारनाथ घूमकर आध्यात्मिकता से जुड़ा जा सकता है। इसके अलावा बनारस में ललिता घाट और नेपाली मंदिर, संकट मोचन मंदिर और दुर्गा कुंड, बनारस की संकरी गलियों और स्ट्रीट फूड का भी आनंद लिया जा सकता है।
बनारस यात्रा के दौरान सर्दियों के मौसम में मलाइयो, कचौरी-सब्जी और जलेबी, चूरा मटर, टमाटर चाट, बाटी-चोखा, मलाई टोस्ट और कुल्हड़ चाय के साथ ही प्रसिद्ध बनारसी पान का स्वाद चार चांद लगा देता है। सर्दियों के मौसम (अक्टूबर से मार्च) में बनारस (वाराणसी) में ठहरने के लिए घाटों के पास, गोदौलिया, सिगरा और कैंट स्टेशन के आस-पास के इलाके सबसे बेहतरीन माने जाते हैं।
जबकि सर्दियों के मौसम में अयोध्या की यात्रा करना सुखद अनुभव होता है। इस दौरान यहां का मौसम सुहावना और ठंडा रहता है। यहां अध्यात्म, वास्तुकला और इतिहास का बेहतरीन संगम देखने को मिलता है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र है। सर्दियों के मौसम में भगवान श्रीराम के दर्शन से पुण्य का लाभ तो मिलता ही है, इसके साथ एक अलग उत्साह भी होता है।
अयोध्या आने पर कोई हनुमानगढ़ी न जाए तो यात्रा अधूरी-सी लगती है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के दर्शन करने से पहले हनुमान जी के दर्शन करने चाहिए। हनुमान जी के दर्शन करने के लिए 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सर्दियों के मौसम में सीढ़ियां चढ़ने से अलग ही ऊर्जा का संचार होता है। इसके अलावा कनक भवन भी जाया जा सकता है। यहां माता सीता और भगवान श्रीराम का बहुत ही शानदार महलनुमा मंदिर है। शाम के वक्त सरयू नदी के तट पर की जाने वाली आरती को बिल्कुल भी छोड़ना नहीं चाहिए। नदी के घाटों पर जलते हुए दीये और कोहरे के बीच आध्यात्म के मेल की अनुभूति काफी आनंददायक हो जाती है।
अयोध्या में दशरथ महल, मणि पर्वत, गुलाब बाड़ी और मकबरा भी देखा जा सकता है। इतिहास और वास्तुकला में रुचि है तो नवाब शुजाउद्दौला का यह मकबरा देखा जा सकता है। यह खूबसूरत गुलाब के बगीचों से घिरा हुआ है। सर्दियों के मौसम में अयोध्या की प्रसिद्ध कचौड़ी-सब्जी और गरमा-गरम रबड़ी-जलेबी का स्वाद लिया जा सकता है। यहां ठहरने की भी कोई समस्या नहीं है। यात्रियों के पास धर्मशाला, बजट होटल और लग्जरी होटल जैसे कई विकल्प मौजूद हैं।
--आईएएनएस
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