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संत रविदास की 650वीं जयंती पर भाजपा का समरसता संकल्प अभियान, तालकटोरा में होगा कार्यक्रम

 

नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती के मौके पर भारतीय जनता पार्टी पूरे साल समरसता संकल्प अभियान चला रही है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने इसकी जानकारी दी।

उन्होंने बताया, "प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित होकर और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मार्गदर्शन में भाजपा संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती को पूरे साल मनाने के लिए एक अभियान चला रही है। उस अभियान का नाम है समरसता संकल्प अभियान। यह अभियान 29 जुलाई, गुरु पूर्णिमा के दिन से शुरू हुआ है।"

लाल सिंह आर्य ने आईएएनएस से बताया कि इसी अभियान के तहत दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में सोमवार को एक बड़ा समरसता संकल्प अभियान और कलश वितरण कार्यक्रम होने जा रहा है। इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के साथ सभी सांसद, सभी विधायक और सभी मंत्री मौजूद रहने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य संत रविदास की वाणी और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। यह अभियान 20 फरवरी 2027 तक चलने वाला है और इसे पांच चरणों में चलाया जाएगा।

29 जुलाई को इसके तीन कार्यक्रम शुरू हुए थे। पहला कलश वंदना कार्यक्रम, जो आज दिल्ली में हो रहा है। दूसरा संत संपर्क अभियान, जिसके तहत अभी तक पूरे देश में 25 हजार से ज्यादा संतों से संपर्क किया जा चुका है। तीसरा कार्यक्रम समरस दीप अभियान है, जिसके तहत लगभग 51 हजार से अधिक स्थानों पर दीपोत्सव का कार्यक्रम किया गया है। 10 सितंबर तक कलश वंदन पूजन का कार्यक्रम पूरा हो जाएगा।

इसके बाद समरसता संपर्क यात्रा जालंधर से निकलेगी। यह यात्रा जालंधर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, चंडीगढ़, हरियाणा और दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश होते हुए काशी में जाकर समाप्त होगी। पांचवा चरण छात्र संपर्क अभियान होगा। इसके तहत संत रविदास के विचारों को छात्रों के बीच पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ये सभी अभियान करीब सात महीने तक चलने वाले हैं और इस दौरान संत रविदास से जुड़े जो महत्वपूर्ण स्थान हैं, उनका समग्र विकास करने का संकल्प भाजपा सरकार ने लिया है।

संत रविदास भक्ति काल के महान संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास सीर गोवर्धनपुर में सन 1376 या 1377 में माघ पूर्णिमा के दिन हुआ था। वे निर्गुण भक्ति धारा के संत थे और बाहरी दिखावे या मूर्ति पूजा के बजाय मन की पवित्रता पर जोर देते थे।

उनका प्रसिद्ध वाक्य "मन चंगा तो कठौती में गंगा" है, जिसका अर्थ है कि अगर मन साफ है तो घर में ही गंगा स्नान का फल मिल जाता है। उन्होंने एक ऐसे आदर्श समाज बेगमपुरा का सपना देखा था, जहां किसी भी तरह का दुख, कर या जात-पात का भेदभाव न हो।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम