संत रविदास जयंती पर मायावती का तीखा हमला: चुनावी स्वार्थ में संतों के संदेश से खिलवाड़ कर रही हैं सरकारें
लखनऊ, 1 फरवरी (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने श्री रविदास की जयंती के अवसर पर सरकारों और राजनीतिक दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आज संतों और महापुरुषों के मानवतावादी संदेशों को राजनीतिक और चुनावी स्वार्थ की भेंट चढ़ा दिया गया है, जिसके कारण समाज में अमन-चैन, भाईचारा और आपसी सौहार्द कमजोर हुआ है।
संत रविदास को शत-शत नमन करते हुए मायावती ने देश-दुनिया में रह रहे उनके करोड़ों अनुयायियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग इसे आत्मसात करने के बजाय केवल दिखावटी श्रद्धा तक सीमित रखे हुए हैं।
बसपा प्रमुख ने कहा कि संत रविदास ने अपना संपूर्ण जीवन जाति-भेद, द्वेष और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष में लगाया और मानव जाति की समानता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज कथनी और करनी के बीच बढ़ती खाई के कारण समाज में अशांति, असंतोष और अविश्वास का माहौल बनता जा रहा है। मायावती ने आरोप लगाया कि संत रविदास के उपदेशों का प्रयोग राजनीतिक दल केवल चुनावी लाभ के लिए कर रहे हैं, जबकि उनके करोड़ों अनुयायियों की उपेक्षा जारी है।
उन्होंने कहा कि संत रविदास का संदेश धर्म की पवित्रता को समाज सेवा और जनचेतना से जोड़ता है, न कि सत्ता और स्वार्थ की राजनीति से। भदोही जिले का मुद्दा उठाते हुए मायावती ने कहा कि बसपा सरकार ने संत रविदास के सम्मान में भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर किया था, जिसे समाजवादी पार्टी सरकार ने जातिवादी और राजनीतिक द्वेष के कारण समाप्त कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने भी अब तक इस नाम को बहाल नहीं किया है, जो दोनों दलों की समान सोच को दर्शाता है। मायावती ने कहा कि बसपा शासनकाल में संत रविदास की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए, जिनमें वाराणसी में संत रविदास पार्क और घाट की स्थापना, फैजाबाद में संत रविदास राजकीय महाविद्यालय, संत रविदास सम्मान पुरस्कार, चंदौली में संत रविदास पॉलिटेक्निक, वाराणसी में एससी-एसटी प्रशिक्षण संस्थान और गंगा नदी पर बने पुल का नाम संत रविदास के नाम पर रखा जाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि बसपा की स्थापना से पहले कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों ने दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के संतों और महापुरुषों की लगातार उपेक्षा की। अब इन्हीं वर्गों के राजनीतिक जागरूक होने के बाद ये दल केवल वोटों के स्वार्थ में संतों और महापुरुषों को याद करते नजर आते हैं।
मायावती ने जनता से अपील की कि वे ऐसे राजनीतिक दलों से सावधान रहें जो संतों के नाम पर राजनीति करते हैं, लेकिन उनके अनुयायियों के उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए ईमानदार प्रयास नहीं करते। उन्होंने कहा कि संत रविदास और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों पर सच्चे मन से अमल कर ही समाज और देश को वास्तव में न्यायपूर्ण, समतामूलक और समृद्ध बनाया जा सकता है।
--आईएएनएस
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