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सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने डार्क स्टोर पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की

 

नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। भाजपा सांसद और ऑल इंडिया ट्रेडर्स कन्फेडरेशन (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डार्क स्टोर के बढ़ते चलन पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संसद के मॉनसून सत्र 2024 के दौरान उन्होंने डार्क स्टोर पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था।

खंडेलवाल ने अपने पोस्ट में लिखा कि उनका उद्देश्य क्विक कॉमर्स मॉडल के अनियंत्रित विस्तार को रोकना है। यह मॉडल शहरी योजना को बिगाड़ रहा है, आस-पास के छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचा रहा है, अनुचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहा है और डिलीवरी वर्कर्स पर असुरक्षित दबाव डाल रहा है। उन्होंने वर्कर्स की सुरक्षा, ग्राहकों को धोखा देने वाले दावों, गलत प्रतिस्पर्धा और नियामक कमियों पर लगातार ध्यान दिलाया है।

सांसद ने कहा कि हाल के कुछ कदम, जैसे डिलीवरी के भ्रामक दावों पर कार्रवाई, उनके द्वारा संसद के अंदर और बाहर उठाए गए मुद्दों को और मजबूत करते हैं। उनका मानना है कि इस सिस्टम में सतही सुधारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि संरचनात्मक बदलावों की जरूरत है। वे एक निष्पक्ष, जवाबदेह और मानवीय डिजिटल कॉमर्स फ्रेमवर्क की मांग कर रहे हैं और इसे शुरुआत बताते हुए संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है।

इसके अलावा, खंडेलवाल ने एक पत्र भी साझा किया, जिसमें डार्क स्टोर के बढ़ते प्रभाव का विस्तार से जिक्र है। पत्र के अनुसार, भारतीय शहरों में दस मिनट डिलीवरी वाले क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के कारण डार्क स्टोर तेजी से फैल रहे हैं। ये माइक्रो-वेयरहाउस के रूप में काम करते हैं, जहां कोई वॉक-इन ग्राहक नहीं आता और सिर्फ ऐप-आधारित डिलीवरी होती है। ज्यादातर मामलों में इन्हें बिना किसी जांच के आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले इलाकों में स्थापित कर लिया जाता है।

इन डार्क स्टोर को रिटेल दुकान के रूप में गलत तरीके से पेश करके ट्रेड लाइसेंस ले लिया जाता है, जिससे वे जोनिंग कानूनों, सुरक्षा नियमों और पर्यावरणीय मानदंडों से बच जाते हैं। इनके संचालन में बड़े पैमाने पर भंडारण, लगातार वाहनों की आवाजाही और लॉजिस्टिक्स शामिल होता है, जो आवासीय इलाकों के लिए अनुपयुक्त है।

इससे शहरों में ट्रैफिक जाम, ध्वनि प्रदूषण, सुरक्षा जोखिम और पर्यावरणीय खतरे बढ़ रहे हैं। कई इमारतें वेयरहाउसिंग के लिए डिजाइन नहीं की गई हैं, जिससे संरचनात्मक खतरा पैदा हो रहा है। पारंपरिक छोटे व्यापारी, किराना दुकानें और स्थानीय दुकानदार आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं, क्योंकि डार्क स्टोर नियमों से बचकर कम लागत पर काम करते हैं। इससे असमान प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है और स्थानीय व्यापार की स्थिरता खतरे में पड़ रही है।

प्रवीण खंडेलवाल ने 'डार्क स्टोर उन्मूलन और जोनिंग प्रवर्तन विधेयक, 2025' का जिक्र करते हुए कहा कि यह बिल आवासीय, वाणिज्यिक और मिश्रित उपयोग वाले जोन में डार्क स्टोर पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि लॉजिस्टिक्स वेयरहाउस सिर्फ औद्योगिक जोन में काम करें और अनधिकृत संचालन पर सख्त दंड लगे।

--आईएएनएस

एसएचके/डीएससी