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संसद में जारी गतिरोध पर विपक्ष का सरकार पर हमला, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

 

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। संसद का मानसून सत्र एक बार फिर सुचारु रूप से नहीं चल सकी। नीट पेपर लीक विवाद, छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच जारी टकराव को लेकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने केंद्र सरकार पर जुबानी हमला किया। विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना सदन में सार्थक चर्चा संभव नहीं है।

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने संसद की कार्यवाही ठप होने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन जब सत्तारूढ़ दल के सांसद खुद धरना-प्रदर्शन पर बैठ जाएं, विपक्ष से टकराव का माहौल बनाएं और नेता प्रतिपक्ष को बोलने तक का अवसर न दें, तो संसद कैसे चलेगी? भारतीय संसदीय इतिहास में ऐसा शायद ही कभी हुआ हो कि सत्ता पक्ष स्वयं विरोध-प्रदर्शन करे और फिर विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने के आरोप लगाए।

राजीव शुक्ला ने कहा कि विपक्ष भी शुरू से चर्चा चाहता है, लेकिन उसकी शर्त स्पष्ट है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही चर्चा का कोई औचित्य होगा, क्योंकि जिस मंत्री के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन चल रहा है, उसी से जवाब दिलाने का क्या अर्थ है? प्रधानमंत्री मोदी सदन में बहस का जवाब देने नहीं आएंगे और केवल सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट से स्थिति नहीं बदलने वाली।

लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने पर कांग्रेस सांसद कैप्टन विरियाटो फर्नांडीस ने सरकार पर छात्रों की भावनाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस छोड़ी गई और सिविल ड्रेस में लोगों से कथित तौर पर छात्रों पर हमला कराया गया। यह सरकार देश के भविष्य यानी छात्रों के खिलाफ खड़ी दिखाई देती है। विपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास के पास भी धरना देकर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री को बचाने में लगी है और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे दें तो संसद की कार्यवाही चल सकती है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट की बात तब होती है, जब दोषी का पता न हो, लेकिन इस मामले में जिम्मेदारी किसकी है, यह सब जानते हैं। अगर जवाबदेही तय करनी है तो शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए। सरकार हर रोज नए बयान और नए तरीके से मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका ने कहा कि विपक्ष और छात्रों की मांग एक ही है, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। विपक्ष पिछले एक महीने से यही मांग दोहरा रहा है और जब तक शिक्षा मंत्री पद नहीं छोड़ते, तब तक विपक्ष चर्चा के लिए तैयार नहीं होगा। सरकार को पहले इस मांग को स्वीकार करना चाहिए, उसके बाद ही सदन में बहस आगे बढ़ सकती है।

समाजवादी पार्टी के सांसद छोटेलाल खरवार ने कहा कि पिछले कई दिनों से छात्र सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं और पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री स्वयं छात्रों से बातचीत करें और पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दें। पेपर लीक करने वालों को फांसी जैसी कठोर सजा देने पर विचार होना चाहिए और जिन छात्रों की कथित तौर पर इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जान गई है, उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसका भी आश्वासन सरकार को देना चाहिए।

खरवार ने कहा कि अन्ना हजारे के आंदोलन के समय तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आंदोलनकारियों से बातचीत की थी और कई स्तरों पर इस्तीफे भी हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा सरकार में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा? यदि सरकार उन्हें मंत्री बनाए रखना चाहती है तो कोई दूसरा विभाग दे सकती है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बड़ी संख्या में पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं और जब तक सरकार विपक्ष की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करेगी, तब तक यह गतिरोध समाप्त नहीं होगा।

--आईएएनएल

पीएसके/एबीएम