संसद को लेकर संजय राउत की टिप्पणी पर भड़के शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम, सख्त हिदायत दी
मुंबई, 23 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत द्वारा संसद को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम का आक्रोश देखने को मिला है। निरुपम ने कहा कि राजनीति और नेताओं पर टिप्पणी ठीक है, लेकिन भारत की संवैधानिक संस्थाओं की पवित्रता पर आंच नहीं आनी चाहिए।
मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बिना वसीयत के उत्तराधिकार के नियमों को चुनौती देने वाली एक याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस जारी करने पर शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा, "मुस्लिम पर्सनल लॉ कई तरह से मुस्लिम पुरुषों और मुस्लिम महिलाओं के बीच भेदभाव करता है। यह एक सच्चाई है। दूसरी ओर, भारत का एक संविधान है जो बराबरी को जरूरी बनाता है, जिसमें कहा गया है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई भेदभाव नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट में अभी जो याचिका है, वह पर्सनल लॉ के कुछ नियमों को चुनौती देती है।"
उन्होंने आगे कहा कि इन नियमों के दो पहलू खास तौर पर दिक्कत वाले हैं; पहला, बिना वसीयत के उत्तराधिकार से जुड़ा नियम गलत है और दूसरा, वह नियम जो पुरुषों और महिलाओं के बीच विरासत में मिली संपत्ति के बंटवारे में भेदभाव करता है। ये दोनों नियम भारत के संवैधानिक ढांचे के खिलाफ हैं।
संजय निरुपम ने कहा कि चुनाव आयोग के काम करने के तरीके के बारे में एक सनसनीखेज रिपोर्ट पब्लिश हुई है। यह एक जांच रिपोर्ट है जिसमें दावा किया गया कि कुछ मुद्दों पर तीनों इलेक्शन कमिश्नरों के बीच राय में अंतर था, फिर भी इन असहमतियों के बावजूद फैसले लिए गए। दो इलेक्शन कमिश्नरों के लेटर का जिक्र किया गया और बताया गया है कि पिछले कुछ महीनों में ऐसे करीब 13-14 लेटर लिखे गए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को चलाने वाला संस्थागत और कानूनी फ्रेमवर्क बहुत स्पष्ट है। सभी फैसले एकमत से, आम सहमति के आधार पर होने चाहिए और अगर किसी खास मामले पर आम सहमति नहीं बनती है, तो बहुमत के आधार पर फैसले लिए जाने चाहिए।
संजय राउत के बयान को लेकर शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें कोई शर्म नहीं है। वह संसद को, जिसके वह सदस्य हैं, देश की सबसे बड़ी संस्था और भारत के पवित्र संविधान से बनी संस्था पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं। संजय राउत को भारत के संवैधानिक संस्थानों के बारे में ऐसी घटिया बातें करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए। मैं इसकी निंदा करता हूं। मैं संजय राउत से गुजारिश करता हूं कि कम से कम संसद को तो छोड़ दें। राजनीति और नेताओं को लेकर आप टिप्पणी करते रहते हैं, कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन भारत की संवैधानिक संस्थाओं की जो पवित्रता है, उसमें आंच न आए, यह हम सभी की जिम्मेदारी है।
--आईएएनएस
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