सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार से पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में उचित बदलाव का किया आग्रह
तिरुवनंतपुरम, 24 अगस्त (आईएएनएस)। सीपीआई(एम) के राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास की ओर से केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) पर सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में उचित बदलाव करने का आग्रह किया गया है।
जॉन ब्रिटास की ओर से बताया गया कि यह नोटिफिकेशन अभी भी पहले के 9,993.7 वर्ग किमी के आंकड़े पर आधारित है, जबकि राज्य सरकार ने सालों पहले ही ईएसए को 98 गांवों तक सीमित करते हुए 8,590.69 वर्ग किमी तक रखने का अपना अंतिम प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर बता दिया था।
पत्र में उन्होंने लिखा, "मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा को सूचित किया था कि ईएसए नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देने से पहले केरल सहित पश्चिमी घाट के छह राज्यों की चिंताओं और सुझावों की योग्यता के आधार पर जांच की जा रही है। हालांकि, इसके ठीक चार दिन बाद, मंत्रालय ने 27 जुलाई 2026 को सातवां ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया, जो राज्य सरकार के संशोधित और आधिकारिक तौर पर स्वीकृत रुख को शामिल किए बिना, केरल के लिए पहले के 9,993.7 वर्ग किमी के प्रस्ताव के आधार पर ही आगे बढ़ रहा है।
डॉ. ब्रिटास ने बताया कि केरल का संशोधित प्रस्ताव कैडस्ट्रल मैपिंग, जीआईएस/केएमएल विश्लेषण, सैटेलाइट इमेजिंग, फील्ड वेरिफिकेशन और स्थानीय स्व-शासन संस्थानों व वन विभाग के साथ परामर्श जैसी व्यापक कवायद के बाद तैयार किया गया था और 2 नवंबर 2024 को केंद्र सरकार को इसकी सिफारिश की गई थी। इसके बाद, 1 फरवरी 2026 को केरल ने मंत्रालय की ओर से मांगे गए अतिरिक्त विवरण उपलब्ध कराए, जो ईएसए को 98 गांवों तक सीमित करते हुए 8,590.69 वर्ग किमी तक रखने के उसके संशोधित प्रस्ताव के समर्थन में थे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा केवल नक्शों और मापों का नहीं है। केरल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों ने प्रस्तावित ईएसए को लेकर एक दशक से अधिक समय तक अनिश्चितता का सामना किया है। किसान, बागान कर्मचारी, वहां बसे लोग, आदिवासी समुदाय, छोटे उद्यमी और स्थानीय स्व-शासन संस्थान, सभी लगातार जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन से जुड़ी अनिश्चितता से प्रभावित हुए हैं। केरल के पहाड़ी इलाकों के लोग संरक्षण के विरोधी नहीं हैं। उनकी जायज उम्मीद है कि पर्यावरण संरक्षण वैज्ञानिक सटीकता, पारदर्शी फैसला लेने की प्रक्रिया और उनकी आजीविका व विकास की आकांक्षाओं के सम्मान पर आधारित होना चाहिए।
डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह केरल की आधिकारिक तौर पर मंजूर अंतिम सिफारिश को सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में शामिल करे और इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा करे, ताकि केरल के पहाड़ी इलाकों के लोगों के सामने बनी लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो सके।
--आईएएनएस
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