संजय राउत ने लगाया राम मंदिर ट्रस्ट में 2000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप, मिसिंग लिंक परियोजना पर महाराष्ट्र सरकार को घेरा
मुंबई, 7 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने मंगलवार को राम मंदिर ट्रस्ट और महाराष्ट्र सरकार को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं की कानूनी जांच की मांग की। संजय राउत ने कहा कि केवल इस्तीफों से मामला खत्म नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र की मिसिंग लिंक परियोजना को लेकर भी राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का आरोप लगाया।
संजय राउत ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस्तीफे हुए हैं, लेकिन इससे सवाल खत्म नहीं हो जाते। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि राम मंदिर में हुई लूट का जवाब कौन देगा?
संजय राउत ने कहा कि अगर 50 रुपए की चोरी होती है तो आरोपी गिरफ्तार हो जाता है और 10 लाख रुपए का मामला सामने आता है तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्रवाई करता है, लेकिन यहां भाजपा से जुड़े लोगों और भाजपा द्वारा गठित राम मंदिर ट्रस्ट पर 550 करोड़ रुपए के नगद घोटाले के आरोप लगे हैं और यह मामला पिछले एक साल से चर्चा में है।
संजय राउत ने दावा किया कि बाद में भगवान राम और माता सीता के आभूषणों की चोरी के आरोप भी सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट में करीब 2000 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। केवल इस्तीफा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और ट्रस्ट को कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इसे लोगों के विश्वास के साथ विश्वासघात बताया।
दूसरी ओर, महाराष्ट्र की मिसिंग लिंक परियोजना को लेकर भी संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के क्षतिग्रस्त होने से 6,700 करोड़ रुपए बर्बाद हो गए। संजय राउत ने इसे देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो खुद को 'इन्फ्रा मैन' कहते हैं और उपमुख्यमंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को परियोजना का ठेका दिया गया, उसे कमीशन, किकबैक और राजनीतिक फंडिंग का लाभ मिला। सरकार विधानसभा में बताए कि आखिर यह परियोजना क्यों विफल हुई। इसकी जिम्मेदारी केवल बारिश पर डालना गलत है। देश में 100-100 साल पुराने पुल, बांध और अन्य निर्माण आज भी सुरक्षित हैं, लेकिन अगर मिसिंग लिंक परियोजना सिर्फ छह महीने में ही क्षतिग्रस्त हो गई तो यह साफ संकेत है कि निर्माण की गुणवत्ता से ज्यादा भ्रष्टाचार को महत्व दिया गया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "इस परियोजना में सीमेंट और मिट्टी कम, भ्रष्टाचार ज्यादा भरा हुआ है।"
--आईएएनएस
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