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सुपौल में पुलिस की कथित दबंगई के विरोध में सफाईकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

 

शहर में सोमवार से सफाईकर्मियों की हड़ताल ने नगर परिषद की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। नगर परिषद के सफाईकर्मी सदर थाना पुलिस की कथित दबंगई के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल की वजह से शहर की सफाई व्यवस्था ठप हो गई है और कई इलाकों में कचरे का अंबार लगने लगा है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला मुख्य रूप से वार्ड नंबर 22 से जुड़ा है। स्थानीय सफाईकर्मियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और उन्हें काम करने से रोकने की कोशिश की। इसके विरोध में उन्होंने अपनी हड़ताल शुरू कर दी।

हड़ताल के कारण शहर के कई प्रमुख इलाके गंदगी से भर गए हैं। नगर परिषद के अधिकारी भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं और सफाईकर्मियों को मनाने के प्रयास में लगे हुए हैं। लेकिन कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पुलिस की कथित दबंगई के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होती, वे अपने काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हड़ताल के चलते शहर की जनता परेशान हो रही है। न केवल सड़कों पर कचरे का ढेर लग गया है, बल्कि इससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी उत्पन्न हो सकते हैं। वार्डवासियों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि इस मामले को जल्द सुलझाया जाए और सफाई व्यवस्था फिर से सुचारू रूप से चालू की जाए।

पुलिस और नगर परिषद के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह सुनिश्चित करने का दावा कर रहे हैं कि सफाईकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार की अनुचित व्यवहार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था में कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनके विरोध और हड़ताल से न केवल शहर गंदगी की चपेट में आता है, बल्कि आम जनता का दैनिक जीवन भी प्रभावित होता है। इसलिए प्रशासन और पुलिस को जल्द से जल्द इस विवाद का समाधान करना होगा।

हड़ताल ने यह संदेश दिया है कि सफाईकर्मी केवल अपने काम के लिए ही नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित कार्यस्थल की मांग के लिए भी खड़े हैं। स्थानीय अधिकारी और प्रशासन इस स्थिति को लेकर सतर्क हो गए हैं और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं।

इस प्रकार सुपौल में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने नगर परिषद और आम जनता के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। मामले के समाधान तक शहर में गंदगी का ढेर बढ़ता जा रहा है और प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि वह शीघ्र ही स्थिति को नियंत्रित करे।