☰
×

'सानिया मिर्जा एक लेजेंड खिलाड़ी और मेरी आदर्श हैं', डब्ल्यू35 लागोस का खिताब जीतने के बाद बोलीं माया राजेश्वरन

 

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत की युवा टेनिस खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती का मानना ​​है कि उनका पहला प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब सीनियर सर्किट में उनके सफर की बस शुरुआत है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 डबल्स खिलाड़ी सानिया मिर्जा से आगे निकलने का सवाल ही नहीं उठता, जिन्हें वह अपना आदर्श मानती हैं।

17 साल की माया ने नाइजीरिया में डब्ल्यू35 लागोस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रोफेशनल सर्किट में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने यूक्रेन की येलीजावेता कोट्लियार के साथ मिलकर डबल्स का खिताब जीता और फिर मेन ड्रॉ में बिना कोई सेट गंवाए सिंगल्स का खिताब भी अपने नाम किया। 17 वर्षीय माया ने फाइनल में स्पेन की सेलिया सर्विनो रुइज को 6-4, 6-2 से हराया और डब्ल्यू35 सिंगल्स खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय महिला बनीं। इस जीत के साथ उन्होंने सानिया मिर्जा के 22 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

भारत की सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक सानिया से आगे निकलने के बारे में पूछे जाने पर माया ने तुरंत इस तुलना को खारिज कर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूर्व ग्रैंड स्लैम चैंपियन ने अगली पीढ़ी के लिए कितनी बड़ी विरासत छोड़ी है। मीडिया के साथ एक वर्चुअल बातचीत के दौरान माया ने 'आईएएनएस' से ​​कहा, "मुझे नहीं लगता कि आप असल में उनसे आगे निकल सकते हैं, क्योंकि वह एक लेजेंड हैं और हमेशा लेजेंड ही रहेंगी। इसलिए मुझे लगता है कि मैं कई मायनों में उन्हें अपना आदर्श मानती हूं, क्योंकि जब मैं देश में बड़ी हो रही थी, तब वह मेरी आदर्श थीं। उन्होंने ही इतने वर्षों बाद देश में टेनिस को पहचान दिलाई है।"

इंटरव्यू और पॉडकास्ट के जरिए सानिया के सफर को देखने वालीं माया ने कहा कि उन्होंने इस टेनिस आइकन के साथ ज्यादा बातचीत तो नहीं की है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि वह उनके अनुभव से सीख पाएंगी। उन्होंने कहा, "हालांकि, मैंने उनसे ज्यादा बात नहीं की है। काश मैं कर पाती। वैसे, मैं उन्हें बहुत मानती हूं, उनके सभी पॉडकास्ट और इंटरव्यू सुनती हूं। मुझे लगता है कि सानिया हमेशा एक लेजेंड रहेंगी और हमेशा मेरी आदर्श रहेंगी।"

इस टीनएजर के लिए यह एक बहुत बड़ा कदम था क्योंकि वह खेल में आगे बढ़ रही थी। टूर्नामेंट से पहले दुनिया में 1038वें नंबर पर रहने वाली माया ने मेन ड्रॉ के लिए क्वालिफाई किया, फिर पहले राउंड में नंबर वन सीड जस्टिना मिकुलस्काइट को हराया और उसके बाद ऊंची रैंकिंग वाले खिलाड़ियों के खिलाफ भी जीत हासिल की।

उन्होंने अपना शानदार सफर तब पूरा किया जब उन्होंने फाइनल मुकाबले में स्पेन की सेलिया सर्विनो रुइज को 6-4, 6-2 से हराकर प्रो सर्किट में अपना पहला खिताब जीता। इस भारतीय खिलाड़ी ने कोट्लियार के साथ मिलकर चीन की मिन लियू और इटली की कार्लोटा मोसिया को 0-6, 6-2, 10-7 से हराकर डबल्स का खिताब भी जीता था।

इस बड़ी कामयाबी के बावजूद, माया ने अपनी उपलब्धि को बहुत ज्यादा महत्व नहीं दिया और कहा कि यह आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनुभव था। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह बस एक तरह की शुरुआत है क्योंकि यह पहला खिताब है। प्रो करियर शुरू करने के लिए यह एक अच्छा संकेत है। यह निश्चित रूप से एक अच्छी शुरुआत है। हालांकि, मुझे नहीं लगता कि इससे कोई बहुत बड़ी बात होने वाली है, क्योंकि यह बस एक शुरुआत है। अब यह बस एक आत्मविश्वास है, जो मैंने खुद को दिया है कि मैं बेहतर मुकाबला कर सकती हूं। शायद मैं इस आत्मविश्वास को अगले टूर्नामेंट में भी साथ ले जाऊंगी, लेकिन इसकी शुरुआत यहीं से होती है।"

टीनएजर ने कहा कि वह लागोस टूर्नामेंट में बिना किसी उम्मीद के उतरी थीं, इस सोच ने उन्हें रैंकिंग या प्रतिद्वंद्वियों की काबिलियत के बजाय अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की। "हां, सबसे पहले तो जैसा कि आपने कहा, पहला टूर्नामेंट हमेशा खास होता है और इस हफ्ते कई प्यारी यादें बनीं। सच कहूं तो, मेरे लिए यह बस एक और टूर्नामेंट जैसा ही था, क्योंकि मैं काफी समय से मुकाबले में हिस्सा ले रही हूं। एक क्वालिफायर के तौर पर मैंने बस अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और आगे बढ़ती गई।"

मेन ड्रॉ में अपनी बिना हारे आगे बढ़ने की यात्रा के बारे में बात करते हुए माया ने कहा कि इस अनुभव ने उनके इस विश्वास को और पक्का कर दिया कि प्रोफेशनल लेवल पर नतीजे अक्सर इस बात पर निर्भर करते हैं कि उस खास दिन कौन बेहतर खेलता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि सबसे पहले तो मैं बिना किसी उम्मीद के आई थी। क्वालिफायर में एक राउंड जीता और फिर पहले राउंड में टॉप सीड खिलाड़ी के खिलाफ खेलना था। हां, मुझे लगता है कि मैं बस वहां गई और जितना अच्छा खेल सकती थी, खेलने की कोशिश की क्योंकि मुझे लगता है कि इस टूर्नामेंट में मैं अंडरडॉग थी। मैंने बस अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने की कोशिश की और कुछ मैच देखे। आप जानते हैं कि एक खास लेवल के बाद हर कोई अच्छा खेलता है। अगर आप प्रो टूर्नामेंट खेल रहे हैं, तो मुझे लगता है कि हर कोई अच्छे लेवल पर खेलता है। मेरे हिसाब से जब आप कोर्ट पर उतरते हैं, तो असल में यह मायने रखता है कि उस दिन कौन बेहतर खेलता है।"

मिकुल्स्काइट के खिलाफ माया की पहले राउंड की जीत खास तौर पर यादगार रही, क्योंकि पहले सेट में 0-5 से पिछड़ने के बाद उन्होंने वापसी करते हुए उसे 7-5 से जीता और फिर दूसरा सेट 6-1 से अपने नाम किया। उस वापसी को याद करते हुए भारतीय खिलाड़ी ने बताया कि घड़ी पर नजर पड़ने पर उन्हें एक अनोखा ख्याल आया जिसने उन्हें मुकाबले में बने रहने में मदद की।

उन्होंने कहा, "नहीं, यह बहुत मजेदार बात है, क्योंकि मेरी शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही थी। वह निश्चित रूप से एक बहुत अच्छी खिलाड़ी हैं। बहुत कुछ हो रहा था। 0-5 के स्कोर ने घड़ी को देखने के मेरे नजरिए को बदल दिया। कोर्ट पर एक घड़ी लगी होती है। मैंने घड़ी देखी और मुझे लगता है कि मैच शुरू हुए 25 मिनट हो चुके थे। मेरे दिमाग में सबसे पहली बात यह आई कि मैं 25 मिनट में सेट नहीं हारने वाली। इसी कारण मैंने बस बने रहने की कोशिश की। मैंने बस एक बार में एक प्वाइंट पर खेलने की कोशिश की और जब तक हो सके, सेट में बने रहने का प्रयास किया।"

उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने उन्हें दूसरा सेट अपने कंट्रोल में लेने के लिए जरूरी मोमेंटम दिया। "सबसे पहले, अगर मैं 0-5 से पिछड़ने के बाद सेट जीतती हूं, तो मुझे लगता है कि इसका असर होता है। मोमेंटम मेरे साथ था और मैंने बस उसी तरह खेलना जारी रखा जैसे मैं खेल रही थी। कुछ भी नहीं बदला। बस उन बुनियादी चीजों पर ध्यान देने की कोशिश की जिनसे मुझे पहला सेट जीतने में मदद मिली।"

माया ने लागोस में व्यस्त शेड्यूल की चुनौतियों से निपटने में मदद के लिए जूनियर टूर्नामेंट में खेलने के अनुभव का भी श्रेय दिया, जहां खिलाड़ी नियमित रूप से सिंगल्स और डबल्स दोनों में हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जूनियर स्तर पर खेलने का एक अच्छा पहलू यह है कि आपको इस तरह से खेलने की आदत हो जाती है। आप जानते हैं कि जब आप जूनियर स्तर पर खेलते हैं, तो आप हर हफ्ते सिंगल्स और डबल्स खेलते हैं। आप जानते हैं कि जब तक आप प्रो स्तर पर आते हैं, तब तक आपको इसकी आदत हो चुकी होती है।"

उन्होंने कहा कि पूरे हफ्ते शारीरिक रिकवरी प्राथमिकता रही; स्ट्रेचिंग, सही खान-पान और आराम ने उन्हें काम के बोझ से निपटने में मदद की। "मैं अच्छी तरह से स्ट्रेचिंग कर रही हूं। मैं शारीरिक रूप से बिल्कुल ठीक हूं। अब तक, सब कुछ ठीक रहा है - नजर न लगे - और उम्मीद है कि आगे भी सब ठीक रहेगा। इसलिए मैं बस ज्यादा से ज्यादा रिकवर करने, अच्छी तरह से स्ट्रेचिंग करने, अच्छा खाना खाने और मैच के बाद आराम करने की कोशिश कर रही हूं।"

दक्षिण फ्रांस में एलीट टेनिस सेंटर (ईटीसी) में ट्रेनिंग करने वाली इस युवा खिलाड़ी ने स्पेन के महान खिलाड़ी राफेल नडाल की अकादमी के साथ अपने जुड़ाव के बारे में भी बात की। उन्होंने कुछ महीने पहले ही वह अकादमी छोड़ी थी ताकि अपने विकास के लिए सबसे बेहतर विकल्प को चुन सकें।

माया ने साफ किया कि वह अब नडाल अकादमी में ट्रेनिंग नहीं कर रही हैं और यूएस ओपन के समय ईटीसी से जुड़ी थीं। जब उनसे नडाल के साथ रहने के अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने 22 बार के ग्रैंड स्लैम सिंगल्स चैंपियन को एक प्रेरणादायक व्यक्ति बताया, जिनके अनुभव से बड़े टूर्नामेंट की तैयारी कर रहे युवा खिलाड़ियों को फायदा हो सकता है।

माया ने कहा, "मुझे लगता है कि वह सचमुच एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं जिनके साथ रहना बहुत अच्छा होता है। मेरे हिसाब से उनमें लोगों को सिर्फ अपनी मौजूदगी से ही प्रेरित करने का एक खास अंदाज है। स्लैम या बड़े टूर्नामेंट में जाने से पहले वे खिलाड़ियों से बात किया करते थे। और हां, वे हमेशा ही बहुत प्रेरित करने वाले इंसान रहे हैं।"

माया ने पिछले साल गर्मियों में नडाल के अंकल और पूर्व कोच टोनी नडाल के साथ कोर्ट पर बिताए समय को भी याद किया। उन्होंने कहा, "उन्होंने कोचों को कुछ बातें बताई थीं जिन पर मुझे काम करना था। हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे थे। हां, मैंने टोनी नडाल के साथ कोर्ट पर कुछ समय बिताया। मुझे लगता है कि यह पिछले साल गर्मियों की बात है।यह अच्छा अनुभव था।"

"देखिए, लोग अक्सर अपने अनुभवों के बारे में बात करते हैं। वह भी अपने अनुभवों के बारे में ही बताते हैं और जब हम ग्रैंड स्लैम में हिस्सा लेते हैं, तो वे ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास सबसे ज्यादा अनुभव है — या यूं कहें कि उन लोगों में से एक हैं जिनके पास सबसे अधिक अनुभव है। मुझे लगता है कि हां, वे हमें बताते हैं कि किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्या आजमाना चाहिए।"

माया ने माना कि इस साल जूनियर ग्रैंड स्लैम में उनका प्रदर्शन उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन उन्होंने कहा कि वह नतीजों के बारे में सोचने के बजाय उन अनुभवों से सीखने पर ध्यान दे रही हैं। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से प्रदर्शन वैसा नहीं था जैसा मैं चाहती थी। हालांकि, मैंने जैसा कहा कि मुझे लगता है कि ये सब ऐसे सबक हैं जो आप सीखते हैं और ये वे चीजें हैं जो आपको अपने सफर में देखने को मिलती हैं।"

"मैं बस इतना ही कर सकती हूं कि सुधार करने की कोशिश करूं, बेहतर करने की कोशिश करूं और शायद अगले ग्रैंड स्लैम में बेहतर नतीजे पाने की कोशिश करूं। हालांकि,, देखिए, अभी मैं बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं पाल रही हूं। तो हां, काश मैं और बेहतर कर पाती, लेकिन वह बात अब पीछे छूट चुकी है।"

आगे की बात करते हुए इस युवा खिलाड़ी ने कहा कि वह प्रोफेशनल टूर्नामेंट में अधिक नियमित रूप से खेलना चाहती हैं और बड़े इवेंट्स में एंट्री पाने के लिए अपनी रैंकिंग सुधारना चाहती हैं। उनकी योजना आने वाले महीनों में अपनी फिजिकल कंडीशनिंग को बेहतर बनाने और तकनीक में सुधार करने पर भी समय बिताने की है।

उन्होंने कहा, "पहली बात तो ये है कि मुझे नहीं लगता कि मुझमें बहुत अधिक बदलाव आया है, क्योंकि एक खिलाड़ी के तौर पर हमेशा कुछ न कुछ सुधारने की गुंजाइश रहती है। तकनीकी, मानसिक और शारीरिक रूप से हमेशा कुछ न कुछ बेहतर करने की जरूरत होती है। इसी वजह से मैं एक इंसान और एक खिलाड़ी के तौर पर खुद को हर तरह से बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हूं, ताकि कोर्ट पर मुझे मदद मिल सके। मुझे लगता है कि एक समय के बाद चीजें अपने आप सही होने लगती हैं। कभी-कभी ऐसा नहीं होता, लेकिन जब आप लगातार मेहनत करते रहते हैं, तो चीजें बेहतर होने लगती हैं। मुझे लगता है कि तभी असली फर्क पड़ता है। आपको पता नहीं चलता कि कब, लेकिन यही तो इस खेल की खूबसूरती है।"

माया फिलहाल लागोस में मिली जीत से मिला आत्मविश्वास आगे भी बनाए रखना चाहती हैं। उनका लक्ष्य है कि वह मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करें। माया ने कहा कि उन्हें खुद पर और ज्यादा भरोसा करने की जरूरत है। उनके मुताबिक कोई भी खिलाड़ी कभी पूरी तरह तैयार नहीं होता, क्योंकि हमेशा सुधार की गुंजाइश रहती है। लेकिन जब आप एक अच्छे स्तर का प्रदर्शन कर चुके होते हैं, तो अगली बार कोर्ट पर उतरते समय यह विश्वास होना चाहिए कि आप फिर से वैसा खेल दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा, "मैं खुद से यही कहना चाहती हूं कि मैं यह कर सकती हूं। मैं बेहतर खेल सकती हूं और उस स्तर तक पहुंच सकती हूं। इस हफ्ते मुझे ऐसा आत्मविश्वास मिला है, जो पहले नहीं था।"

हालांकि माया के पास जूनियर स्तर पर खेलने के लिए अभी एक साल और बचा है, लेकिन वह जूनियर ग्रैंड स्लैम के साथ-साथ ज्यादा प्रोफेशनल टूर्नामेंट भी खेलना चाहती हैं। अगर उन्हें वाइल्ड कार्ड मिलता है, तो वह चेन्नई ओपन में भी हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं। फिलहाल उनका ध्यान बड़े लक्ष्य तय करने की बजाय लगातार अपने खेल में सुधार करने पर है।

उन्होंने कहा, "मैं जिन भी टूर्नामेंटों में खेलूंगी, उनमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगी और फिर देखूंगी कि क्या होता है। मुझे नहीं लगता कि पहले से यह तय किया जा सकता है कि कोई टूर्नामेंट जीतना ही है। मैं बस खेल का आनंद लेना चाहती हूं, कोर्ट पर मजा करना चाहती हूं और देखना चाहती हूं कि मेरा प्रदर्शन कैसा रहता है।"

--आईएएनएस

एसएम/पीएम