संवैधानिक पदों पर नियुक्ति में देरी पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज, राज्य सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम
रांची, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में लोकायुक्त और सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के रिक्त होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। सोमवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को 10 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में नियुक्तियों की अधिसूचना जारी नहीं हुई, तो सरकार को इसके परिणाम भुगतने होंगे।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नियुक्तियों में हो रही देरी अब स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने इसे अंतिम समयसीमा बताते हुए कहा कि सरकार को हर हाल में 10 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई अब 23 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि 25 मार्च को हुई चयन समिति की बैठक में नामों की अनुशंसा कर फाइल राजभवन (लोक भवन) भेजी गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। इस पर प्रार्थी के अधिवक्ता अभय मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने सूचना आयुक्त के लिए जानबूझकर पांच में से तीन ऐसे नाम भेजे थे, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि थी।
इस पर राज्यपाल की आपत्ति के बाद फाइल वापस हो गई। महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार दोबारा नामों की अनुशंसा कर जल्द ही फाइल राजभवन भेजेगी। उल्लेखनीय है कि राज्य में लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और राज्य सूचना आयोग जैसे शीर्ष पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर पहली जनहित याचिका वर्ष 2020 में दाखिल की गई थी। पिछले छह वर्षों में कई बार सुनवाई होने के बावजूद अब तक इन पदों को नहीं भरा जा सका है।
इस मामले में 1 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान भी हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की थी। तब महाधिवक्ता ने अदालत को जानकारी दी थी कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक हुई है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रार्थी राजकुमार और एडवोकेट एसोसिएशन की ओर से दायर इन याचिकाओं में लगातार दलील दी जा रही है कि महत्वपूर्ण पदों के खाली होने से राज्य की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
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