समुद्री क्षेत्र में गैर-पारंपरिक खतरे लगातार बढ़ रहे हैं: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, 4 जनवरी (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को प्रदूषण नियंत्रण पोत (पीसीवी) 'समुद्र प्रताप' के इंडियन कोस्ट गार्ड (आईसीजी) में शामिल होने की पूर्व संध्या पर जीएसएल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) और अन्य भारतीय शिपयार्डों द्वारा भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए निर्मित जहाज भारत की संप्रभुता के तैरते प्रतीक हैं, जो खुले समुद्र में हमारी उपस्थिति, क्षमता और दृढ़ संकल्प का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बता दें कि जीएसएल द्वारा निर्मित दो पीसीवी में से पहला, समुद्र प्रताप, 5 जनवरी 2026 को गोवा में रक्षा मंत्री की उपस्थिति में शामिल किया जाएगा।
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को एक रणनीतिक आवश्यकता बताया और जीएसएल जैसी संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे इस आवश्यकता को वास्तविकता में बदल रही हैं।
उन्होंने कहा कि जीएसएल क्षमताएं विकसित कर रही है, प्रौद्योगिकी को आत्मसात कर रही है और स्वदेशी डिजाइन को मजबूत कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप सशस्त्र बलों को समय पर उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं और राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गति तेज हो रही है।
आज के जटिल सुरक्षा परिवेश में भारतीय शिपयार्डों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में पारंपरिक चुनौतियों के साथ-साथ गैर-पारंपरिक खतरे भी लगातार बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समुद्र में हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ना, मानव तस्करी, पर्यावरणीय अपराध और संदिग्ध क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियां। ऐसे में शिपयार्डों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। देश के समुद्री इतिहास, नौसेना विरासत और रणनीतिक दूरदर्शिता के केंद्र में स्थित जीएसएल, भारत के रक्षा तंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और समुद्री सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी पर है।
राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि जहाज मात्र इस्पात, मशीनरी और प्रौद्योगिकी का मिश्रण नहीं है, बल्कि यह जनता के भरोसे और सशस्त्र बलों की अपेक्षाओं और जरूरतों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जीएसएल वर्षों से इस भरोसे और अपेक्षाओं को पूरा करता आ रहा है।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत एक सक्रिय समुद्री राष्ट्र के रूप में उभर रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने जीएसएल जैसी संस्थाओं से भविष्य में भारत की विश्वसनीयता को और मजबूत करने का आग्रह किया।
--आईएएनएस
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