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सैनिक स्कूल गोलपाड़ा की कक्षा से भारतीय वायुसेना तक पहुंचने का सफर, फ्लाइंग ऑफिसर के. नीरज चंद्र सिंघा बने युवाओं के लिए प्रेरणा

 

गुवाहाटी, 13 जून (आईएएनएस)। असम के फ्लाइंग ऑफिसर के. नीरज चंद्र सिंघा ने बचपन में देश सेवा का जो सपना देखा था, उसे अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर साकार कर दिखाया है। उन्हें 13 जून को डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी में आयोजित संयुक्त ग्रेजुएशन परेड (कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड) के दौरान भारतीय वायुसेना की मौसम विज्ञान (मेटेरोलॉजी) शाखा में कमीशन प्रदान किया गया।

असम में जन्मे और पले-बढ़े के. नीरज चंद्र सिंघा बचपन से ही वर्दी पहनकर देश की सेवा करना चाहते थे। उनका सफर दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास का प्रेरक उदाहरण माना जा रहा है।

सैनिक स्कूल गोलपाड़ा के पूर्व छात्र रहे सिंघा का कहना है कि इसी संस्थान ने उनके व्यक्तित्व का निर्माण किया और उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, धैर्य, देशभक्ति और चुनौतियों का सामना करने की भावना विकसित की। स्कूल के वरिष्ठ कैडेटों और पूर्व छात्रों को सशस्त्र बलों में सेवा करते देख उन्होंने भी सेना में जाने का संकल्प लिया।

अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत की। अपनी पेशेवर क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने बी.टेक की पढ़ाई पूरी की। साथ ही देश सेवा का सपना देखने वाले अन्य युवाओं का मार्गदर्शन भी किया।

अपने सफर के दौरान उन्हें कई चुनौतियों और अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। धैर्य, समर्पण और निरंतर प्रयासों के बल पर उन्होंने हर बाधा को पार किया और पहले से अधिक मजबूत होकर आगे बढ़ते रहे।

लगातार वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम तब मिला, जब उनका चयन भारतीय वायुसेना की मेटेरोलॉजी शाखा के लिए हुआ। आज भारतीय वायुसेना में एक कमीशंड अधिकारी के रूप में वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के अटूट समर्थन, सैनिक स्कूल गोलपाड़ा से मिले संस्कारों और ईश्वर में अपनी आस्था को देते हैं।

फ्लाइंग ऑफिसर के. नीरज चंद्र सिंघा की यह प्रेरणादायक यात्रा पूर्वोत्तर भारत के युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है। उनका जीवन संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर परिश्रम के बल पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है और देश सेवा का गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त किया जा सकता है।

--आईएएनएस

डीएससी