सड़क हादसों से लड़ेगा एआई, आईआईटी की बिम्सटेक देशों के साथ नई पहल
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। सड़क दुर्घटनाओं में हर साल लाखों लोगों की जान जाती है। अब इस चुनौती से निपटने के लिए एआई का उपयोग किया जा रहा है। इसी सोच के साथ आईआईटी मद्रास ने पहली बार बिम्सटेक एआई रोड सेफ्टी हैकाथॉन 2026 का आयोजन किया।
इसमें भारत समेत सात देशों के युवा दिमागों ने सड़क सुरक्षा के लिए ऐसे डिजिटल समाधान तैयार किए, जो भविष्य में लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। आईआईटी मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय हैकाथॉन में भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के छात्र, इंजीनियर और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। यह आयोजन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संरक्षण में आईआईटी मद्रास परिसर में हुआ।
बिम्सटेक क्षेत्र की आबादी करीब 1.8 अरब है। इस पूरे क्षेत्र में हर साल लगभग 2 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा देते हैं। यही वजह है कि आईआईटी मद्रास ने सड़क सुरक्षा के लिए तकनीक आधारित समाधान खोजने की दिशा में यह अंतरराष्ट्रीय पहल शुरू की है। संस्थान का उद्देश्य है कि बिम्सटेक देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और तकनीक का आदान-प्रदान हो तथा सड़क हादसों को कम करने के लिए साझा समाधान विकसित किए जाएं।
यहां प्रतिभागियों के सामने तीन वास्तविक चुनौतियां रखी गईं। यानी तीन बड़ी समस्याएं व तीन एआई समाधान। पहली चुनौती थी ड्राइवलीगल यानी ऐसा एआई चैटबॉट तैयार करना, जो किसी भी व्यक्ति को उसके स्थान के अनुसार यातायात नियम, जुर्माना और कानूनी जानकारी तुरंत उपलब्ध करा सके। दूसरी चुनौती, रोडवॉच ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित करना, जहां आम नागरिक सड़क के गड्ढों, टूटी सड़क, खराब संकेतक या अन्य समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकें और यह भी देख सकें कि संबंधित विभाग ने उस पर क्या कार्रवाई की। तीसरी चुनौती थी, रोड एसओएस दुर्घटना होने पर तुरंत निकटतम ट्रॉमा सेंटर, एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने वाला एआई आधारित समाधान तैयार करना।
हैकाथॉन के दौरान कुछ टीमों ने ऐसे समाधान विकसित किए, जो मोबाइल फोन में लगे स्पीड सेंसर की मदद से दुर्घटना का पता लगा सकते हैं। खास बात यह रही कि यह प्रणाली इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी दुर्घटना की पहचान कर सकती है। वहीं एक अन्य टीम ने ऐसा एआई चैटबॉट बनाया, जो सड़क कानूनों की जानकारी देने के साथ-साथ लोगों को प्रश्नोत्तरी के माध्यम से यातायात नियम भी सिखाता है। प्रतियोगिता में भारत की ‘साइफर’ टीम ने पहला स्थान हासिल किया। ‘सिविक्स फोर्ज’ दूसरे और ‘तेजस’ तीसरे स्थान पर रही।
तीनों विजेता टीमों को कुल 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। साथ ही आईआईटी मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के साथ अपने समाधान को आगे विकसित करने का अवसर भी मिलेगा। बिम्सटेक देशों की अन्य टीमों में थाईलैंड की ‘रोड लीगल’ और नेपाल की ‘क्यूरिएटर्स’ टीम को उनके अभिनव समाधानों के लिए विशेष प्रशंसा मिली।
हैकाथॉन में चुने गए उत्कृष्ट समाधानों को आईआईटी मद्रास के माध्यम से तकनीकी मार्गदर्शन देकर बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है, ताकि उनका लाभ आम लोगों तक पहुंच सके। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा चुनौती है। ऐसे में बिम्सटेक एआई रोड सेफ्टी हैकाथॉन जैसे प्रयास भारत और पड़ोसी देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ सड़क हादसों को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी के मुताबिक शोध तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज तक पहुंचे। यह हैकाथॉन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां एआई को केवल तकनीक नहीं, बल्कि सड़क पर लोगों की जान बचाने का माध्यम बनाने की कोशिश की गई है।
--आईएएनएस
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