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सात साल से लापता बच्ची के मामले में पुलिस जांच की धीमी गति पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज

 

रांची, 5 मई (आईएएनएस)। झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई बच्ची के मामले में पुलिस जांच की धीमी प्रगति पर एक बार फिर गहरा असंतोष जताया है।

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने लापता बच्ची की मां की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि अगली सुनवाई तक पुलिस इस मामले में कोई ठोस लीड हासिल नहीं कर पाती है, तो जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी जाएगी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और गुमला के पुलिस अधीक्षक से जांच की वर्तमान स्थिति पर जवाब तलब किया।

कोर्ट ने कहा कि पिछले सात वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल पाना बेहद चिंताजनक है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब पुलिस इतने लंबे समय में बच्ची का पता नहीं लगा सकी, तो आगे की प्रगति को लेकर भी गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब में बताया गया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) विभिन्न राज्यों में छानबीन कर रहा है। साथ ही वर्ष 2018 के दौरान बच्ची के संभावित यात्रा संबंधी विवरण जुटाने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे से संबंधित आयु वर्ग के यात्रियों का ट्रैवल हिस्ट्री मांगा गया था, जो अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सरकार ने दावा किया कि पुलिस सभी संभावित पहलुओं पर काम कर रही है। सुनवाई के दौरान गुमला के पुलिस अधीक्षक स्वयं अदालत में उपस्थित रहे और जांच की प्रगति से अवगत कराया। हालांकि अदालत उनके जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी और जांच में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई। इससे पूर्व 20 अप्रैल को हुई सुनवाई में भी हाईकोर्ट ने मामले में ढिलाई पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि जांच में सार्थक प्रगति नहीं होती है, तो मामला सीबीआई को ट्रांसफर किया जा सकता है। उस दौरान राज्य की पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र वर्चुअल माध्यम से पेश हुई थीं।

उल्लेखनीय है कि लापता बच्ची की मां ने इस मामले में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की है। हाईकोर्ट पहले भी लापता बच्चों के मामलों में जांच की गति तेज करने, तकनीक के बेहतर उपयोग और आधार डेटा के प्रभावी इस्तेमाल के लिए मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दे चुका है। इसके बावजूद इस मामले में अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है।

--आईएएनएस

एसएनसी/एएस