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25 पैसे में दिलाई थी जनसंघ की सदस्यता, पीएम मोदी के साथ बिताए दिनों को याद कर भावुक हुए अंबालाल कोष्टी

 

गांधीनगर, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनके सहयोगी और मित्र अंबालाल कोष्टी ने उनके शुरुआती राजनीतिक जीवन और संघ के दिनों की कई यादें साझा की हैं। अंबालाल कोष्टी वर्तमान में गुजरात भाजपा की लाइब्रेरी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

अंबालाल कोष्टी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उन्होंने ही छात्र जीवन में नरेंद्र मोदी को भारतीय जनसंघ की सदस्यता दिलाई थी और बाद में उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ने में मदद की।

उन्होंने बताया कि उनकी नरेंद्र मोदी से मुलाकात उस समय हुई थी, जब वे छात्र थे और गुजरात स्टेट ट्रांसपोर्ट से जुड़े एक आंदोलन के दौरान कोष्टी धरने पर बैठे थे। मोदी अपने परिचितों की गुजरात स्टेट कॉर्पोरेशन की कैंटीन में बैठा करते थे। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई।

कोष्टी ने बताया, "छात्र जीवन के दौरान नरेंद्र मोदी मुझसे बात करते थे। उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा और ज्ञान से मैं प्रभावित हुआ। मुझे लगा कि यह लड़का हमारे साथ काम करने के लिए तैयार है। इसलिए मैंने उनसे दोस्ती की और उन्हें पार्टी से जोड़ने का फैसला किया।"

उन्होंने बताया कि मुलाकात के करीब 25 दिन बाद नरेंद्र मोदी पहली बार उनके घर आए। उस समय कोष्टी कांकरिया वार्ड के महामंत्री थे। उन्होंने 25 पैसे सदस्यता शुल्क लेकर नरेंद्र मोदी को भारतीय जनसंघ का सदस्य बनाया।

कोष्टी ने बताया कि जनसंघ में काम करने के दौरान नरेंद्र मोदी ने संघ से जुड़ने की इच्छा जताई। उन्होंने उनसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल होने में मदद करने का अनुरोध किया। इसके बाद कोष्टी उन्हें संघ कार्यालय लेकर गए, जहां उस समय 'वकील साहब' संघ के कामकाज के जिम्मेदार थे। उन्होंने नरेंद्र मोदी से बातचीत की और उन्हें संघ की गतिविधियों से जोड़ लिया।

अंबालाल कोष्टी ने अपने और नरेंद्र मोदी के संघ के दिनों को याद करते हुए कहा कि दोनों ने साथ में लंबे समय तक काम किया। वे कांकरिया वार्ड में संघ की शाखा चलाते थे और सारंगपुर केरी पीठा में भी एक शाखा का संचालन करते थे। इस दौरान नरेंद्र मोदी के साथ उन्होंने कबड्डी खेली और एक ही साइकिल पर साथ-साथ यात्रा भी की।

उन्होंने कहा, "मैं कांकरिया वार्ड का जनरल सेक्रेटरी था। इसलिए कांकरिया में संघ कार्यालय पर शाखा चलाता था। सारंगपुर केरी पीठा में भी शाखा चलाता था। इस तरह मैं दो शाखाओं में काम करता था। उस समय संघ कार्यालय में नरेंद्र भाई के साथ भी काम किया। हमने साथ में कबड्डी खेली और एक ही साइकिल पर साथ-साथ यात्रा की।"

कोष्टी ने बताया कि संघ के शुरुआती दिनों में नरेंद्र मोदी ने संगठन के लिए काफी प्रवास किया। मोदी एक झोले में कुछ कपड़े लेकर निकल जाते थे और जहां रहने की व्यवस्था हो जाती, वहीं रुक जाते थे। कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने शाखा और संगठन से जुड़े कई छोटे-बड़े काम किए। यहां तक कि झाड़ू लगाना और अपने कपड़े धोना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

उन्होंने कहा कि उस दौर में किसी ने नहीं सोचा था कि नरेंद्र मोदी एक दिन देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। "उस समय संघ में लोग आसानी से नहीं आते थे। नरेंद्र भाई ने कार्यकर्ता के तौर पर बहुत मेहनत की। उन्होंने अपना जीवन देश और संगठन के लिए समर्पित कर दिया।"

कोष्टी ने मोदी की याद्दाश्त और सादगी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की चीजों को याद रखने की क्षमता बहुत अच्छी थी। प्रवास के दौरान जो भोजन मिल जाता, वे उसी से संतुष्ट हो जाते थे।

उन्होंने कहा कि जब वे दोनों साइकिल से घूमते थे, उस समय कांग्रेस का गुजरात में मजबूत जनाधार था। इसके बावजूद जनसंघ और बाद में भाजपा के वोट प्रतिशत में मामूली बढ़ोतरी भी कार्यकर्ताओं के लिए खुशी का कारण बनती थी।

अंबालाल कोष्टी ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने संगठन में काम करते हुए लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई और लगातार मेहनत की। "आज पार्टी को गर्व होता है कि नरेंद्र भाई और उस समय के जूनियर नेताओं ने जो मेहनत की, उसका फल आज देश और समाज को मिल रहा है।"

नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर कोष्टी ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और इसके बाद उन्होंने सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष पूरे किए हैं। यह दिन भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा।

अपने पुराने मित्र के लिए भावुक होते हुए कोष्टी ने कहा, "नरेंद्र मोदी को 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मैं उन्हें बहुत आशीर्वाद देता हूं। मैं अपनी आयु भी उन्हें देता हूं। आज नरेंद्र भाई पूरे विश्व में चमक रहे हैं। कोई भी संकल्प ऐसा ही होना चाहिए।"

--आईएएनएस

एसएके/पीएम